दुर्गा के नौ रूप — उर्मिला पाण्डेय उर्मि

हमारे भारत देश में देवी शक्ति की पूजा प्राचीन काल से होती चली आ रही है।
आज भी आदि शक्ति देवी की पूजा अनेक रूपों में की जाती है।
आदि शक्ति सती के मृत शरीर को जब भगवान शंकर लेकर घूम रहे थे सारे संसार में प्रलय जैसा वातावरण दिखाई दे रहा था। भगवान शंकर को रोक पाना कठिन था तब भगवान बिष्णु ने अपने चक्र से उनके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए जो इक्यावन शक्तिपीठ हैं उन्ही शक्ति पीठों में माता वैष्णोदेवी ज्वाला देवी चिंतपूर्णी देवी मनसा देवी नैना देवी कामाख्या देवी आदि शक्ति पीठ हैं।
माता रानी की विशेष पूजा के लिए प्रत्येक बर्ष में चार नवरात्रि,होती हैं उनमें से दो गुप्त नवरात्रि हैं आषाढ़ और माघ मास के महीने की। चैत्र मास और क्वार आश्विन मास की नवरात्रि सभी जगह प्रसिद्ध हैं।
चैत्र मास की नवरात्रि नये बर्ष के उपलक्ष में मनाईं जाती हैं।
जब देवताओं और दैत्यों में युद्ध छिड़ा हुआ था देवता पराजित हो गए इंद्र आदि देवता अपनी जान बचाकर मातारानी की स्तुति करने लगे बहुत ही दुखी होकर आतृनाद किया उसी माता पार्वती वहां से निकलीं उनके शरीर से एक दिव्य शक्ति दश भुजा वाली प्रकट हुई जिन्हें कौशिकी के नाम से जाना जाता है उन देवी को सभी देवताओं ने अपने अपने हथियार दिए। इंद्रदेव ने खड्ग बिष्णु ने चक्र धनुष बाण शंख गदा पदम आदि शिवजी ने त्रिशूल डमरू आदि दिए पहले दिन देवी ने शैलपुत्री के रूप में सभी की रक्षा की दूसरे दिन बृह्मचारिणी तीसरे दिन चंद्रघंटा और चौथे दिन माता कूष्ठमांडा पांचवें दिन स्कंदमाता छठवें दिन षष्ठी देवी कात्यायनी सातवें दिन कालरात्रि बनकर देवताओं की रक्षा की आठवें दिन महागौरी का रूप धारण किया नवें दिन सिद्धिदात्री रूप धारण कर देवताओं को आठों सिद्धियां नव निधियां प्रदान कीं इस मातारानी ने नौ रूप धारण किए और देवताओं को विजय दिलाई। देवताओं से कहा अब तुम्हारे ऊपर कभी भी संकट आए तो हमें याद करना मैं प्रकट हो जाऊंगी इस प्रकार देवताओं को आशीर्वाद मातरानी अंतर्ध्यान हो गयीं तभी से यह नवरात्रि मनाईं जाने लगीं। नवरात्रि में मां की पूजा विशेष पूजा होती है।
पहले शैलपुत्री पार्वती दूसरी बृह्मचारिणी बृह्माकी शक्ति तीसरी चंद्रघंटा जिनके मस्तक पर चंद्रमा चमकता है चौथी कूष्ठमांडा कुष्मांड ऋषि की पुत्री पांचवी कार्तिकेय की मां स्कंदमाता षष्ठी देवी कात्यायनी कात्यायन ऋषि की पुत्री सप्तमी दुष्टों का संहार करने वाली कालरात्रि अष्टमी महागौरी पर्वत की पुत्री नवमी सिद्धिदात्री देवी इस प्रकार नौ रूप माता के मुख्य है।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश।




