विद्यार्थी 450 पोषाहार 100 का भी नहीं बनता, बाकी..भीलवाड़ा में सरकारी स्कूल में मिड डे मील में घपला !

डॉ. चेतन ठठेरा स्वतंत्र पत्रकार
जयपुर। सरकार सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए दोपहर का भोजन के रूप में पोषाहार अर्थात मिड डे मील (खाना) देती है। लेकिन बच्चों के खाने मैं भी भ्रष्टाचार करने से शिक्षा विभाग के कार्मिक शिक्षक नहीं चूक रहे हैं। अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी विभाग द्वारा आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई यह सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है।
यह मामला भीलवाड़ा जिले के कोटडी ब्लॉक में स्थित राजकीय स्वामी विवेकानंद मॉडल विद्यालय में एक सप्ताह पूर्व उस समय सामने आया जब कोटड़ी ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अशोक पारीक निरीक्षण करने पहुंचे तो पता चला कि विद्यालय में पोषाहार खाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 450 है लेकिन पोषाहार अर्थात मिड डे मील (दोपहर का भोजन) केवल 80 से 100 विद्यार्थीयों का बन रहा है और यह पिछले लंबे समय से चल रहा बताते हैं यह सामने आया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ही यहां प्रधानाचार्य महावीर भट्ट लगभग पिछले 8 सालों से पदस्थ हैं और यह असंभव है कि इसकी जानकारी प्रधानाचार्य को नहीं हो ?
मिड डे मील बनाने के लिए अर्थात कुकिंग कन्वर्जन के लिए सरकार द्वारा प्रति विद्यार्थी ₹10 भुगतान किया जाता है तथा चावल अनाज आदि अलग से दिया जाता है इस तरह लगभग गणना की जाए तो प्रतिदिन साढे 300 विद्यार्थियों का भजन केवल कागज में बन रहा था और किस प्रकार प्रतिदिन 3500 रुपए कुकिंग कन्वर्जन में घपला हो रहा है? और इस हिसाब से अगर आकलन किया जाए तो इसलिए 8 सालों में अगर इस तरह स्थितियां चल रही है तो यह आंकड़ा 96 लाख रुपए करीब जाता है। आशंका तो यह भी जताई जा रही है कि इस तरह दूध वितरण में भी गड़बड़ी हो सकती है ?
अब सवाल जो संदेह को जन्म देते हैं
अब सवाल यह उठता है कि यह मामला उजागर होने के 7 दिन बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा इस संबंध में अभी तक उच्च स्तरीय जांच पड़ताल नहीं की गई की मिड डे मील में कब से यह अनियमितता अर्थात घपला चल रहा है? और क्या दूध वितरण में भी ऐसा ही हो रहा है ?




