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कुछ सवाल: विश्लेषण — सीमा शुक्ला चांद

कुछ सवाल जैसे ‘कैसे हो ‘, और ‘क्या चल रहा है’, ‘कहां हो’, ‘भोजन किया’ , ‘कुछ खाया’ , ‘कैसा रहा आज का दिन’, ‘और बताओ’, इत्यादि। ये कुछ शब्दों का समूह नहीं है वास्तविकता में भावनाओ की एक कड़ी है। प्रश्न करने वाले की तरफ से देखें तो विभिन्न भावनाओं से युक्त हैं ये शब्द। जब ये सवाल एक जन्मदात्री करती है अपने पुत्र और पुत्री से तब उसके मायने ममत्व के रस को दिखाती है। आप किसी अन्य शहर में काम पढ़ाई या अन्य कार्य से हो और आपकी जन्मदात्री आपसे पूंछ ले ‘कैसे हो बेटा’ तो सोचा है उस मां के मन में क्या क्या बातें रही होंगी जो वह इस सवाल में आपसे पूंछ रही। वह अभी सिर्फ़ यह नहीं जानना चाहती की आप स्वस्थ हो या नहीं वो चाहती है की आप उसे बताओ की क्या आप उतने ही अच्छे हो जितने उस मां के आंचल में थे। वो जानना चाहती है की क्या आप भी उसकी कमी महसूस कर रहे हों।वह जानना चाहती है की आपकी आज की दिनचर्या क्या है। वह जानना चाहती से की क्या आपने कुछ खा लिया है। ये जो प्रश्न है कैसे हो मां अपने लिए भी आपसे सुनना चाहती है। ऐसे ही उसका यह प्रश्न ‘कुछ खाया भोजन किया’ भी महज एक वाक्य नहीं उसकी भावनाओं का अंबार है। वै यह नहीं जानना चाहती की आप बस इतना कह दो हां का लिया। वै जानना चाहती है क्या खाया आपका पेट भर गया कहीं आप भूखे तै नहीं है। क्या आप उसके बनाए भोजन को याद करते हैं!
इसी प्रकार यदि एक पिता यही प्रश्न करता है तो वो भी केवल आपका हाल नहीं जानना चाहता वह जानना चाहता है आपकी आवश्यकताओं कै आपके संयम को आपके पास किन चीजो की दिक्कत है। वो जानना चाहता है की क्या आज भी आपको उनकी उंगलियों की आवश्यकता है।
इसी प्रकार यदि एक प्रमिका के मुख से ये प्रश्न आए तो उसके अर्थ में उनके मध्य का प्रेम दिखाई देता । इन प्रश्नों में प्रेमिका अक्सर अपने लिए वक्त चाहती से।आप पूरे दिन कहां व्यस्त थे क्या जैसे वह अपने व्यस्ततम समय भी आपको याद करती है आपके लिए सपने संजोती है क्या आप भी उसके लिए यही सपने देखते हैं।
ये जो दो तीन शब्दों में बने प्रश्न हैं इनके अर्थ बहुत ही गहरे अर्थ लिए हुए हैं।
सीमा शुक्ला चांद

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