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*नारी : शक्ति, समर्पण और स्वाभिमान* – राजेश कुमार ‘राज’

 

पिता के लिये तू कात्यायनी तुल्य,
सभी भाइयों की बहना बहुमूल्य।
पति की सहचरी हर सुख-दुख में,
संतानों के लिए सागर वात्सल्य।

सीता बन भटकी राम संग वन-वन,
राधा बन कर रास रचाये श्याम संग।
जब आई बात मातृभूमि रक्षण की,
लड़ी जंग गोरों संग रानी झाॅंसी बन।

तू माता और प्रथम शिक्षिका महान,
करती घर की सर्व समस्या निदान।
करती है दो कुलों के मान की रक्षा,
तू है सर्वगुण सम्पन्न धैर्य-निधान।

अंतस में तेरे सुलगती है ज्वाला,
उर में भरी पड़ी है प्रेम की हाला।
गले से कभी लगाया प्रियतम को,
कभी नाश दानवों का कर डाला।

©राजेश कुमार ‘राज’

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