राष्ट्रप्रेम के ओजस्वी स्वरों से गूँजी कल्पकथा की 240वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था द्वारा भारत माता के प्रति समर्पित भावनाओं से ओतप्रोत 240वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी का भव्य आयोजन देशभक्ति / राष्ट्रप्रेम विषय पर अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। साहित्यिक आयोजन में देश के विविध प्रांतों से जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकारों एवं काव्य साधकों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और राष्ट्रनिष्ठ रचनाओं के माध्यम से भारतभूमि के प्रति अपनी श्रद्धा, समर्पण और गौरव का सशक्त प्रकटीकरण किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर छत्तीसगढ़ के विद्वान साहित्यकार प्रमोद पटले ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सीवान बिहार से प्रतिष्ठित साहित्यकार बिनोद कुमार पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मंगलमय शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा अत्यंत भावपूर्ण गुरु वंदना, गणेश वंदना तथा सरस्वती वंदना के संगीतमय प्रस्तुतीकरण के साथ हुआ, जिसने समस्त वातावरण को आध्यात्मिक और साहित्यिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।
इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े प्रतिष्ठित साहित्यकारों हेमचंद्र सकलानी, कुसुम सिंघल, किरण अग्रवाल, पूनम सिंह प्रिय श्री, मनोज कुमार गुप्ता मंजुल, अमित पंडा अमिट रोशनाई, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, विराट मिश्रा, नैन्सी श्रीवास्तव, आत्म प्रकाश कुमार, प्रेमलता कुमारी, दिनेश कुमार दुबे, कीर्ति त्यागी, अतुल कुमार खरे, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, सुनीता रानी ममगाई, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, दीदी राधा श्री शर्मा, दीपिका वर्मा, सम्पत्ति चौरे स्वाति, कृष्ण कुमार निर्माण, ज्योति प्यासी, डॉ मंजू शकुन खरे, विजय रघुनाथराव डांगे, बिनोद कुमार पाण्डेय, प्रमोद पटले, एवं पवनेश मिश्र ने राष्ट्रप्रेम की भावनाओं से अनुप्राणित अपनी सशक्त काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का कुशल, गरिमामय एवं प्रभावपूर्ण संचालन दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने सहज, सौम्य और साहित्यिक शैली में संपूर्ण आयोजन को अनुशासित एवं रोचक बनाए रखा। इस साहित्यिक गोष्ठी में दर्शक के रूप में राजेश जी, नन्द किशोर बहुखंडी, उर्मिला तिवारी ‘योगमाया’, संजय राय ‘साईं’, सुनील कुमार खुराना, संदीप मारू गोठवाल एवं सांद्रा लुटावन गणेश सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
कार्यक्रम के अंत में पवनेश मिश्र द्वारा भावपूर्ण आभार प्रदर्शन किया गया। तत्पश्चात “वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव वर्ष” के अंतर्गत सभी प्रतिभागियों द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का गायन किया गया। इस राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण में अंततः “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर संस्था परिवार ने पुनः यह संकल्प दोहराया कि साहित्य की दिव्य धारा के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का सतत संवर्धन करते हुए समाज को जाग्रत और प्रेरित करने का यह पावन अभियान निरंतर गतिशील रहेगा।




