Uncategorized

सहयोग स्वेच्छा या विवशता — सीमा शुक्ला चांद

इश्वर द्वारा निर्मित सभी सजीवो और निर्जीवो में मात्र मनुष्य ही ऐसी निर्मित कृति है जिसे ईश्वर ने विवेक यानी बुद्धि दी है. इस बुद्धिमान जीव ने ही संग्रह को पहले आवश्यकता फिर आदत बना लिया। ईश्वर द्वारा निर्मित प्रत्येक कृति मनुष्य को छोड़कर एक दूसरे के सहयोग के बिना अपनी जीवन सुचारू रूप से चला पाता है। आप देखिए एक पंछी जो डाल पर बैठता है वो अपने घर का निर्माण स्वयं ही करता है स्वयं ही भोजन तलाशता है स्वयं अपना लालन पालन करता है वह अपने मुंह में उतना ही दाना रखता है जितने में उसकी त्वरित की क्षुधा समाप्त हो जाए। वह सुबह प्राप्त भोजन का संचय शाम तक के लिए भी नहीं करता। इस तरह से वह दूसरे पंछीयों के लिए भोजन में सहयोग करता है यह सहयोग स्वेच्छा से उसके द्वारा किया गया है। वहीं दूसरी ओर मनुष्य जो विवेकशील है वह दूसरे के हिस्से का भोजन भी अपनी थाली में रख लेना चाहता है जिसकी उसे समाज में सभी से सहयोग की आवश्यकता होती है इसे हम दो किस्सों से समझ सकते हैं।
अनु बंटी और विकास तीन मित्र हैं और एक ही दफ्तर में कार्यरत हैं। अनु को किसी वृद्धाश्रम में सहयोग करने के लिए किसी समीति का सदस्य बनाया जाता है उसे बंटी वा कार्यालय के अन्य सदस्यों से सहायता के निर्देश प्राप्त है। जब वह बंटी व विकास से सहयोग मांगता है तब विकास तो सहयोग करता है परंतु बंटी सहयोग करने से मना कर देता है वो अनु को ऐसा महसूस करवाता है जैसे अनु यह सहयोग अपने स्वंय के हितों की रक्षा के लिए मांग रहा है। विकास ने स्वैच्छिक सहयोग कर यह बताया की उसे ज्ञात है संग्रह धन का नहीं सद्कर्म का करना है वहीं बंटी असहयोग करके प्रसन्न हैं। उसके लिए यह सहयोग विवशता का परिचायक है। यदि किसी का सहयोग हृदय से पूर्ण मन से किया जाए तो वह मन को स्वर्ग की स्थिति तक पहुंचा देता है। और वही यदि सहयोग बेमन से किया जाए तो वह सहयोग के सम्पूर्ण रसो का अंत कर देता है। अतः कभी भी सहयोग पूर्ण मन से किया जाना चाहिए। ईश्वर ने समझने की शक्ति सिर्फ मनुष्य को प्रदान कर यह बताया है की मनुष्य सत्य को जाने। और जीवन का प्रथम व अंतिम सत्य सिर्फ मृत्यु ही है। सभी को ज्ञात है जीवन आरम्भ में जीव के दोनों हाथ रिक्त थे एवं अंत में भी रिक्त ही रहेंगे तो फिर संग्रह को नकार कर सहयोग को स्वैच्छिक बनाना ही मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है
सीमा शुक्ला चांद

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!