विषय क्या आप मानते है — डॉ संजीदा खानम शाहीन

लघु कथा
कभी भी दुष्ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्बाद नहीं करती बल्कि हमेशा अच्छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्बाद करती है ये बात बिल्कुल सौ टका सही है ।
बुरे लोग बुरा करके तो बैठ जाते है
लेकिन वास्तव में बुरा तब होता है जब
अच्छे लोग बुराई के खिलाफ आवाज नहीं उठाते।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाया जाना चाहिए ।क्योंकि मानवता यही
बताती है ।सक्रिय नागरिक आज समाज हित के लिए अपने कदम सत्य के खिलाफ उठाए तभी समाज हित होता है।
समाज का प्रत्येक व्यक्ति अगर सत्य असत्य के प्रति आवाज उठाने के लिए
तत्पर रहे तो समाज की भलाई निश्चित ही होगी ।
बुरा व्यक्ति अपनी हरकतों से तब तक
बाज नहीं आएगा जब तक उसको सबक सिखा कर उसे अहसास नहीं कराया जाए ।
बात पुरानी है सत्य और मार्मिक है ।
एक बार की बात है एक बच्ची फुलवा
नाम की जिसके माता पिता बच्ची के जनम से लेकर अब तक खुशी मनाते बच्ची के पैदा होने की ।एक बार बच्ची के पिता को अचानक बाहर किसी काम से जाना पड़ा ।
बच्ची का चाचा बच्ची को स्कूल छोड़ने गया और उसके साथ दुष्कर्म किया ।बच्ची कही दिनों से पीड़ित थी
ऐसी हरकते वो करता और बच्ची को डरा धमका देता ।बच्ची खुद के घर में ही सुरक्षित नहीं ।
जब बच्ची घर आई तो ,बच्ची 8 वर्ष की मासूम नाम फुलवा ,मां के बहुत पूछने पर बात बताई घटना सुनकर मां के होश उड़ गए और उस दिन से रिश्तों पर से विश्वास ही उठ गया । मानवता और अपनापन जैसे खत्म हो गया ।
निर्दयी चाचा को दया न आई ,पुलिस को बात बताने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया ।लेकिन उस मासूम का बचपन छिन गया।
वो बच्ची किसी की भी हो सकती है निशाने पर, अगर आवाज न उठाई
जाए तो, आपकी, हमारी या समाज के किसी वर्ग विशेष की ।
डॉ संजीदा खानम शाहीन




