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लघु कथा:किस्मत का खेल — पालजीभाई वी राठोड़ ‘

‌एक छोटा सा गांव में मनोज नाम का लड़का रहता था। बचपन से ही मनोज के माता पिता चल बसे थे। उसके परिवार में चाचा चाची थे उसकी भी कोरोना में मृत्यु हुई। अब मनोज जीवन में अकेला हो गया। परिवार में कोई नहीं था।
मनोज ने सोचा;’परिवार में कोई नहीं है,गांव में रहकर क्या करेंगे।’ मनोज छोटे से शहर में आया।मकान किराये पर रखा और जो सी कंपनी में नौकरी करने लगा।उसके पड़ोस में एक वृद्ध दंपति रहता था।मनोज वहां आता जाता रहता था। मनोज का स्वभाव सरल था। उस को माता पिता का प्रेम नहीं मिला था। बचपन से ही वो बेसहारा बना हुआ था। माता पिता और परिवार के प्रेम से वंचित था। वृद्ध दंपति में उसने माता पिता दिखाई देता था। समय मिलने पर उसके घर जाता था। कभी कभी बीमार होने पर सेवा भी करता था। वृद्ध दंपति सोचते थे;’ मनोज अच्छा लड़का है। हमारी कितनी सेवा करते हैं। उसको सिर्फ मीना एक ही लड़की थी। भगवान नेलड़के से वंचित रखा था।मिना ही उसका सब कुछ था। मीना और मनोज दोनों समवयस्क था। मनोज कंपनी से घर आकर मीना को मिलता जुलता था। बाग में जैसे नव पुष्प पललवित हो इसी तरह धीरे धीरे मनोज और मीना का प्रेम भी नव पल्लवित होने लगा। प्रेम की कोंपले अंकुरित होने लगी। वृद्ध दंपति ने बहुत दिवालिया देखी थी। उसने एहसास हो गया था कि मनोज और मीना एक दूसरे को चाहते हैं। एक बार मीना के माता पिता ने मनोज को घर बुलाया और कहा;’बेटा,हम जानते हैं कि तुम और मीना एक दूसरे को बहुत चाहते हो।’मगर तुम तो जानते ही हो मीना हमारी एकलौती बेटी है। उसके चले जाने के बाद हम बे सहारा हो जाएंगे। वृद्धावस्था का सहारा है। हम चाहते हैं तुम दोनों लग्न के बाद हमारे साथ रहे। तुम्हें कोई एतराज ना हो तो हमें कोई दबाव नहीं डालती तुम और मीना हमारे साथ रहो यही हमारी इच्छा है। मनोज को बहुत खुशी हुई।मनोज को माता पिता और सब कुछ मिल गया।मन ही मन सोचने लगा;’ किस्मत का खेल भी अजीब है। मेरा कोई नहीं था आज सब कुछ मिल गया। मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा करने लगा। किस्मत में हो तो मिल ही जाता है। थोड़ा परिश्रम करने की आवश्यकता है। महेनत, विश्वास हमें मार्गदर्शित करते हैं। किस्मत तक पहुंचा देते हैं।हमें सदैव अपने आत्मविश्वास को जगाए रखना चाहिए अकेले खड़े रहने का साहस होना चाहिए क्योंकि लोगों के पास ज्ञान देने के लिए समय है साथ देने के लिए नहीं। जीवन में उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए।उम्मीद एक ऐसी ऊर्जा है जिससे जिंदगी का कोई भी अंधेरा हिस्सा रोशन किया जा सकता है।
“साहस धीरज सत्यता निज मन का विश्वास,
ये गुण हों यदि व्यक्ति में हर मंजिल हो पास।”

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

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