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हिन्दू राष्ट्र के समावेशी विचार से ओत – प्रोत रही कल्पकथा काव्यगोष्ठी। सनातनी इच्छा शक्ति जागृत करें तो भारत हिन्दू राष्ट्र अवश्य बनेगा। – मधुप जी,

 

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि २२२वीं काव्य गोष्ठी हिन्दू राष्ट्र के समावेशी विचार से ओत – प्रोत रही।

आशुकवि भास्कर सिंह माणिक जी के मंच संचालन के कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना के साथ हुआ।वाराणसी के विद्वान साहित्य मनीषी अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप की अध्यक्षता एवं नई दिल्ली के ज्योतिषाचार्य योगेश गहतोड़ी यश के मुख्यातिथ्य का ऑनलाइन कार्यक्रम पांच घंटों और दो चरणों में पूर्ण हुआ।देश भर से जुड़े विद्वान सृजनकारों के इस आयोजन में समग्र चिंतन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, स्वरोजगार, जाति भेद रहित समाज, स्त्री सम्मान, परहित, अहिंसा, करुणा, समान अवसर, और विचार आधारित जीवन परंपराओं के विज्ञान सम्मत कारणों पर चर्चा और काव्य रचनाओं से वातावरण सुवासित हुआ।उत्तरकाशी उत्तराखण्ड से आनंदी नौटियाल ने सवैया छंद में धरती यह त्याग तपोबल की रचना प्रस्तुत की।आसनसोल पश्चिम बंगाल से डॉ सुधांशु मिश्र ने राष्ट्र भक्ति को समर्पित मेरा भारत देश महान है गीत से आयोजन को आगे बढ़ाया।

गोरखपुर उप्र से जुड़े डॉ श्याम बिहारी मिश्र ने अपना देश काव्य से भारत वर्ष की महानता को नमन किया।डॉ अंजू सेमवाल ने उत्तराखंड रजत जयंती विशेष गीत उत्तराखंड पावन भूमि से माहौल आनंदित किया।भोपाल मप्र से जुड़ीं राष्ट्र प्रेमी सृजनकार सविता बांगड़ सुर ने भारत को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाना है के स्वरबद्ध गायन से उत्साह का संचार किया।विजय डांगे ने संगीतबद्ध गीत हिन्दू राष्ट्र की ध्वजा गा रही गीत देश की शान रचना से मन मोह लिया।ज्योतिषाचार्य योगेश गहतोड़ी यश ने वेदों की गूंज जहां अब भी गगन में समाई काव्य रचना के साथ आयोजन को गौरवान्वित किया।

पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप ने अब हम नया गीत लिखेंगे रचना के साथ कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की।इनके अलावा ज्योति प्यासी, दिनेश कुमार दुबे, संपत्ति चौरे स्वाति, भगवानदास शर्मा प्रशांत, किरण अग्रवाल, सुनील कुमार खुराना, रमेश चंद्रा गौतम, मधु वशिष्ठ, अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र, आदि ने भी काव्य पाठ किया।अध्यक्षीय उद्बोधन में पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप ने सामाजिक सद्भाव, सुरक्षित और खुशहाल देश के लिए हिंदू राष्ट्र की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सनातनी इच्छा शक्ति जागृत करें तो भारत हिन्दू राष्ट्र अवश्य बनेगा वहीं मुख्य अतिथि ज्योतिषाचार्य योगेश गहतोड़ी यश ने सहभागी साहित्यकारों की रचनाओं की प्रशंसा करते हुए कहा देश जब तक हिंदू बहुल है तभी तक सुरक्षित है।आमंत्रित अतिथियों सहभागी साहित्यकारों एवं उत्साहित दर्शकों का आभार प्रकट करते कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा ने आयोजन की सफलता पर संतोष प्रकट किया। अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव वर्ष के सम्मान में वन्दे मातरम् गायन किया गया। तत्पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया।

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