डीवीवीएनएल फतेहाबाद में 29 करोड़ का टेंडर घोटाला, तीन साल से चल रहा था भ्रष्टाचार का खेल

अरुण शर्मा। नजर इंडिया 24 जिला ब्यूरो चीफ
फतेहाबाद। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) फतेहाबाद में भ्रष्टाचार के मामले पहले भी प्रकाश में आते रहे हैं। अब यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पूरे दक्षिणांचल में हड़कंप मचा है। दक्षिणांचल में यह घोटाला बीते तीन सालों से चल रहा था।मुख्य अभियंता की जांच में संदिग्धता पर 10 नवंबर 25 को लेखाकार सतीश कुमार भी निलंबित कर दिया। मुख्य अभियंता ने 12 नवंबर 2025 को 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के टेंडरों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई। अधीक्षण अभियंता राजकुमार, उप मुख्य लेखाधिकारी राहुल आकड़ और लेखाधिकारी अंजूने जांच में टेंडर खंगाले।

31 दिसंबर 2025 को कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में आठ टेंडरों का प्रकाशन हुआ और सीधे फर्म के नाम अनुबंध कर दिया। जबकि चार टेंडर की निविदा निरस्त कर फर्मों को अनुबंधितकिया गया। इसके अलावा 40 टेंडर प्रकाशित नहीं किए गए और फर्म को दे दिए। इस मामले में 29 करोड़ का भ्रष्टाचार किया गया। एमडी नितीश कुमार ने अधीक्षण अभियंता डीएन प्रसाद, अधीक्षण अभियंता आरके मिश्रा को निलंबित कर दिया था। सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता वीके सिंह और अरविंद कुमार पांडेय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करा दी थी।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
। 1. नीरज पाठक, शिविर सहायक
2. विनोद कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ।
3. अरविंद कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता।
4. रविकांत मिश्रा, तत्कालिन अधीक्षण अभियंता ।
5. डीएन प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ।
6. सतीश कुमार, तत्कालीन लेखाकार।
7. राजू, मां दुर्गा कंन्सट्रक्शन फर्म।
8. रामसेवक सिंह, सीडीआरएम पावर प्राइवेट लिमिटेड।
9. उपेंद्र कुमार दीक्षित, कृष्णा इलेक्ट्रिकल्स एंड कंसट्रक्शन्स ।
10. श्रीनिवास चौहान, शिवा इंटरप्राइजेज।
11. योगेश सिंह चौहान, ऋषि एंटरप्राइजेज।
12. रघुवीर सिंह, रघुवीर कांट्रेक्टर्स।
13. मुकेश चौहान, एंटरप्राइजेज फर्म।
14. राजेश सिंह, आरएस एंटरप्राइजेज।
15. रामसेवक सिंह, महाकाल एंटरप्राइजेज ।
16. निखिल माथुर, मैसर्स न्यूटेक इलेक्ट्रिकल्स।
17. अखिलेश कुमार दुबे, अमोघ एसोसिएट्स।
18. राजकुमार शर्मा, मैसर्स समाधिया एंटरप्राइजेज ।
19. राहुल कुमार, मैसर्स भोले इंटरप्राइजेज ।
*52 टेंडर में तीन साल हुआ भ्रष्टाचार, 11 फर्मों पर अधिकारियों ने लुटाया प्यार*
आग की भेंट चढ़ गईं फाइलें
फतेहाबाद सर्किल के टेंडरों में भ्रष्टाचार का खेल नया नहीं है। आर्थिक लाभके लिए निजी फर्मों को मनमर्जी से टेंडर दिए गए। शासन की तय टेंडर प्रक्रिया को लगातार दरकिनार किया गया। सूत्रों के अनुसार तीन साल से पूर्व के टेंडरों की कई फाइलें आग की भेंट चढ़ गईं। इनमें दर्ज अनियमितताओं के सबूत खत्म हो गए। कुछ महत्वपूर्ण फाइलें जानबूझकर गायब की गई। मामले के उजागर होने के बाद विभागीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और आगे की जांच में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान कुछ और बड़ों के नाम का खुलासा हो सकता है।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में हुए 29 करोड़ के टेंडर घोटाले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। विजली विभाग ने मृत फर्म स्वामी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। प्रो मैसर्स चौहान इंटरप्राइजेज के मालिक की मई 2024 में मौत हो गई थी। फिर भी नवंबर 24 तक फर्म सक्रिय रही है। फर्म को बंद नहीं किया।
इधर, निदेशक वित्त ने फतेहाबादसर्किल में एक साल के टेंडर की जांच कराई थी। इसमें तमाम अनियमितता मिली थीं, जांच दल ने रिपोर्ट में खुलासा किया था। लेकिन, संबंधितों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई।
*डीवीवीएनएल के फतेहाबाद में साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के बिजनेस प्लान की टेंडर*
प्रक्रिया में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। आर्थिक लाभ के लिए 29 करोड़ के 52 से टेंडर में हेराफेरी की गई। शिविर सहायक नीरज पाठक, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार, तत्कालीन अधिक्षण अभियंता रविकांत मिश्रा, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता डीएन प्रसाद, तत्कालीन लेखाधिकारी सतीश कुमार सहित 13 फर्म स्वामियों पर मुकदमा कराया है। इसमें एक फर्म प्रो ओ मैसर्स चौहान इंटरप्राइजेज के मुकेश चौहान आरोपी हैं। जबकि, उनकी मई-2024 को मृत्यु हो चुकी है नियमानुसार विभाग की प्रोपराइटर फर्म को तत्काल निष्क्रिय कर देना चाहिए था।
_छह साल से फतेहाबाद में था नीरज_
फतेहाबाद सर्किल में शिविर सहायक नीरज पाठक छह मार्च-2019 से तैनात था। वो तैनाती के समय से ही निविदा का कार्य देख रहा था। सितंबर में डीवीवीएनएल के निदेशक वित्त ने एक अप्रैल-2024 से 31 मार्च-2025 तक टेंडर फाइल की प्रारंभिक जांच कराई थी। जांच समिति ने नीरज पाठक को उक्त मंडल से अन्यत्र किसी और मंडल में स्थानांतरित करने की प्रबल संस्तुति की थी। इसके बाद भी इसे यहां से नहीं हटाया गया। वो कार्यालय में ही तैनात रहा।
_कार्यालय की आग में तीन संदिग्ध_
सितंबर की जांच में भी टेंडर पत्रावलियों में व्यापक रूप से गडबडी पाई थीं। कार्यालय में लगी आग के पीछे उन्हें अधीक्षण अभियंता रविकांत मिश्रा, लेखाधिकारी सतीश कुमार और शिविर सहायक नीरज पाठक की संदिग्धता प्रतीत हुई। जांच दल ने अनुशंसा की थी कि जब तक पूर्व वर्ष टेंडर फाइल की जांच पूरी नहीं होती है। तब तक मंडल में निविदा संबंधी कार्य का अधिकार किसी अन्य मंडल की सक्षम समिति को हस्तनांतरित कर दिया जाए। ये जांच रिपोर्ट मुख्य अभियंता को एक नवंबर 2025 को मिली। शिविर सहायक को निलंबित किया।
_मनमर्जी लुटाए गए टेंडर धरातल पर हो जांच_
मुख्य अभियंता की जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार आठ टेंडर का प्रकाशित किए गए। उसके बाद सीधे फर्म के नाम अनुबंध कर दिया। चार टेंडर की निविदा निरस्त कर दी और सीधे फर्म को अनुबंध कर दिया। 40 टेंडर ऐसे थे, जिन्हें प्रकाशित नहीं किया और फर्म के नाम अनुबंध कर दिया। ऐसे में जानकारों का कहना है कि टेंडर में जब खुलेआम धांधली हुई है तो धरातल पर किए गए कार्यों की भी जांच होनी चाहिए। स्टोर से इसका सत्यापन कराना चाहिए। ताकि, कार्य हुए या नहीं। इसका खुलासा भी हो सके।




