संस्मरण – सपना बबेले स्वरा

दोस्तों जब कृष्ण जी की बात हो तो मेरे मन बचपन का एक संस्मरण याद आ जाता है।
मेरे दादा की ननिहाल कालपी जिला जालोन में थी, बहुत ही बड़ा घर,राधा कृष्ण का निजी मंदिर और शिव जी का ऐतिहासिक फालेश्वर मंदिर था , मेरे दादा जी दादी और मैं कालपी में ही रहते थे।
मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता था,सुबह से ही मंदिर की सजाने का काम शुरू हो जाता था।
मेरी दादी जिन्हें हम बाई कहते थे, ठाकुर जी के राजभोग की तैयारी में लग जातीं थी। रुच रुच के भगवान के लिए भोजन पकवान आदि बनाती थी।
पांच बजे यमुना जी स्नान करने के बाद कन्हैया के स्नान के लिए जल लेकर आते,और दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाते। राधे कृष्ण की बहुत ही भारी मूर्तियां थीं।जब दादा जी की उम्र पचहत्तर वर्ष की हो गई तो कृष्ण और राधा जी को श्रंगार के लिए सिंहासन से नीचे उतारने में कठिनाई होती थी।
दादा जी के संग हम भी भगवान की सेवा में हाथ बंटाते थे।
एक दिन विनती करने पर कन्हैया लाल तो फूल से हल्के हो गये
लेकिन राधारानी अपनी जगह से उठाने पर टस से मस नहीं हुई।
फिर दादाजी ने अपना सिर राधारानी के चरणों में रखते हुए विनती की कि मैया अगर हमसे सेवा लेना हो तो भार हल्का करो और चलो सुंदर पोशाक और सुंदर श्रंगार के लिए,आप तो बहुत दयालु हैं।आप कैसी लगेगी जब कन्हैया जी पूरे श्रंगार के साथ आसन पर आपके साथ विराजमान होंगे।
मैं पास में राधा जी की पोशाक लिए खड़ी सब देख रही थी। दादा जी की आंखों में भाव के अश्रु बह रहे थे।
विनती करके दादा जी ने जैसे ही उन्हें उठाया तो ऐसे लगा कि जैसे कोई गुड़िया हाथों से उठा ली हो। मैं भी देखकर अचंभित रह गई। फिर खूब सजाया राधा कृष्ण जी को।इत्र लगाकर सिंहासन पर विराजमान किया। झांकी भी बहुत सुंदर सजाई।
रात बारह बजे भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी जन्मोत्सव के लिए।
जन्मोत्सव होते ही घंटा घड़ियाल, शंखनाद के साथ कृष्ण भगवान की आरती हुई।
सबको प्रसाद वितरण किया गया है।और छठी तक रोज शाम को बधाईयां गाई जाती थी बहूत सुहानी यादों में बीता मेरा बचपन।
हर साल जन्माष्टमी पर में उन्ही की यादों में खोई रहती हूं और भगवान का धन्यवाद किया करती हूं जो मुझे अपनी सेवा का अवसर दिया । मेरा जीवन धन्य हो गया आज भी उन्हीं के चरणों में समर्पित हूं। भगवान भाव के भूखे हैं,ये संस्मरण इसी बात का प्रतीक है।
सपना बबेले स्वरा झांसी उत्तर प्रदेश।



