सबमें कला है — महेन्द्र कुमार सिन्हा

परमात्मा ने हम सबको बनाया है,तो सबमें कुछ ना कुछ अलग-अलग कला दिया है।हम सबमें कोई ना कोई विशेष गुण दिया है,हुनर दिया है।कोई गायन में, कोई वादन में, को लेखन में तो को शिक्षण में, कोई खेती में मिस्त्री में कोई बढ़ाई में कोई चिकित्सा में कोई वकालत में कोई राजनीति में निपुण है।कुल मिलाकर कहें तो परमात्मा के बनाये सभी जीव जंतु में कोई ना कोई विशेष कला होती है।जो कला आपमें है ओ किसी में नहीं है।परमात्मा सबको एक विशेष गुण प्रदान करके भेजा है।मनुष्य को प्रभु ने वरद पुत्र के रूप में सृष्टि को सजाने संवारने के लिए चयनित किया है।
परमात्मा अपने विचार को वाणी कर्म भावों को मनुष्य के कृत्य के रूप में प्रगट करता है।
अतः मनुष्य के ऊपर परमात्मा के उत्तराधिकारी होने का बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।प्रकृति पर्यावरण परिवार समाज राष्ट्र को सम्हाल के रखने की विशेष जवाबदारी है।
नर हो तो नारायण बन जाना।
नर हो तो नरपशु मत बन जाना।।
इसी में ही मानव जीवन की सार्थकता है।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय महासमुंद छत्तीसगढ़




