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शिक्षक की सीख — रमेश शर्मा

 

हमारे मकान में एक यदुवंशी परिवार रहता था। वो बीयरिंग बनाने का काम करते थे। दो बच्चे थे उनके। घर खर्च अच्छे से चल जाता था। उनकी पत्नी सिलाई का काम करती थी।
जब बड़ा बच्चा दसवीं में 70%नंबर लेकर पास हुआ तो उन्होंने कहा भाई साहब इसे आगे क्या विषय दिलवाये।
मैंने उस बच्चे से आधा घंटे बात की। उसकी रूचि को जाना और उन्हें विज्ञान (गणित) दिलवाने के लिए कहा।
वो बोले हमारे घर में कोई इतना पढ़ा लिखा नहीं है। यह आगे कैसे पढ़ाई करेगा। मैंने कहा चिंता मत करो मैं इसे गाइड कर दूंगा। उन्होंने मेरी बात मानकर उसे विज्ञान (गणित) में प्रवेश दिला दिया।
बच्चे ने बारहवीं कक्षा 75% से पास कर ली। मैंने कहा
इसे अब इंजीनियरिंग में प्रवेश दिला दो। वे बोले इतने पैसे का इंतजाम कैसे होगा। मैं ने कहा बैंक उच्च शिक्षा के लिए ऋण देता है। आप प्रवेश के वक्त सिर्फ छ: महिने की फीस भर दो। उन्होंने कालेज में प्रवेश दिला दिया। और छ: महिने की फीस जमा करवा दी। और बैंक में लोन के लिए आवेदन कर दिया।
चार साल में इंजीनियर बन गया और आज एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम कर रहा है। उस बच्चे का उसके परिवार का जीवन बन गया।
वो मुझे अपना गुरु मानते हैं। और मेरी दी गई सीख से परिवार का जीवन बन गया।
रमेश शर्मा

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