अनश्वर बंधन — कविता साव

यह कथा उन आत्माओं की है जो दूर होकर भी कभी जुदा नहीं हुए। समय के हर प्रहार को सहा,लेकिन प्रेम बना रहा एक अनश्वर बंधन के रूप में।
एक छोटे से गाँव में मनु नाम का एक युवक रहता था जो शांत स्वभाव और गहन विचार वाल था।उसी गाँव में सरिता नाम की एक कन्या रहती थी,जिसका हृदय कोमल,निर्मल और सरल था। दोनों का बचपन एक साथ गुजरा और देखते ही देखते दोनों
ने यौवन की दहलीज पर पाँव रखा। फिर ना जाने कब और कैसे दोनों का साथ प्रेम में परिवर्तित हो गया।
समय के साथ मनु को गाँव से बाहर किसी बड़े शहर में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाना पड़ा।
जाते समय सरिता मनु से मिलने आई और कहा _जो कभी मेरी याद आए तो चाँद को देख लेना ,मैं भी उसी चाँद को देखूंगी और हम दूर रहकर भी जुड़ जाएंगे। वर्षों बीते , दोनों एक दूसरे को पत्र लिखते। पत्रों में हृदय से जुड़ाव तो था,परंतु दूर रहने के भार से बोझिल भी था।
फिर भी दोनों के आत्मिक बंधन अटूट रहे।
शिक्षा पूर्ण करके जब मनु गाँव वापस लौटा तो पता चला कि सरिता का विवाह कहीं और
तय हो चुका है,यह जानकर मनु
दंग रह गया। जब सरिता से मिला तो सरिता की आँखें भर आई और रुंधे स्वर में बोली _मनु
मैं तुम्हारी ही रहूंगी।हमारा ये प्रेम
किसी शरीर का मोहताज नहीं,हम तो हृदय से जुड़े हैं जिसे दुनिया की कोई ताकत ना तो अलग कर सकती है और ना ही हमारे इस बंधन को तोड़ सकती है।
सरिता विवाह करके दूर चली गई।मनु ने अपने जीवन को तपस्या में ढाल दिया। गाँव से दूर सुनसान जगह जहाँ एक पुराना बरगद का पेड़ था,उसी पेड़ के नीचे बैठ कर सरिता की यादों को
काव्य में पिरोने लगा लगा। ऐसा लगता था जैसे मनु के ये सारे काव्यात्मक शब्द सरिता के हृदय को छू रहा हो।
हर रात को मनु उसी बरगद के नीचे बैठ चाँद को एक टक देखता रहता और मुस्कुराता,शायद इस उम्मीद में की सरिता भी उसी चाँद को देख रही होगी तभी तो ये एहसास हो रहा है जैसे वो मेरे पास बैठी मेरे
साथ मुस्कुरा रही है।
कुछ दिन बाद मनु को पता चला कि सरिता ने इस संसार विदा ले लिया ,उसी रात मनु बरगद के नीचे चाँद को देखता रहा और आंसुओं में डूबकर मौन हो गया।प्रातः काल लोगों ने उसे वहीं शांत अवस्था में पाया।
गाँव के उस बरगद के नीचे
हर चाँदनी रात को एक आवाज गूंजती है _ सरिता……और उसी क्षण एक स्वर लौटता है मनु……
बरगद की छाया और चाँद की गहराई में आज भी मनु और सरिता की धड़कने गूंजती है।इस
संसार ने भले ही उन्हें अलग कर दिया ,लेकिन उनका प्रेम जीवित है___एक अमिट,अनश्वर बंधन बनकर।
इससे ये पता चलता है कि
प्रेम मात्र एक भाव नहीं बल्कि
आत्मा से आत्मा का जुड़ाव है,एक अटूट बंधन है,जिसे ना समय तोड़ सकता है और ना ही मृत्यु मिटा सकती है।प्रेम तो अमर है,अनश्वर है।
कविता साव
पश्चिम बंगाल




