नवरात्रि — डॉ इंदु भार्गव जयपुर

नवरात्रि का धार्मिक महत्व:
नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री – की पूजा की जाती है। हर दिन देवी के एक स्वरूप की विशेष पूजा होती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इन नौ दिनों में माँ दुर्गा धरती पर आती हैं और अपने भक्तों के दुख दूर करती हैं!
सांस्कृतिक और सामाजिक पक्ष:
नवरात्रि का उत्सव केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। गुजरात में गरबा और डांडिया रास जैसे नृत्य रूप इस पर्व की शोभा बढ़ाते हैं। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का विशेष आयोजन होता है, जहाँ माँ दुर्गा की विशाल मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं और भव्य पंडाल सजाए जाते हैं। उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा के कार्यक्रमों की शुरुआत भी नवरात्रि से होती है!!
नारी शक्ति का प्रतीक:
नवरात्रि केवल देवी पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, साहस, धैर्य और करुणा का भी प्रतीक है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब-तब शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा प्रकट होकर पाप और अन्याय का नाश करती हैं!!
सार :-
नवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने भीतर की नकारात्मकता को हटाकर आत्मबल, संयम और श्रद्धा के साथ जीवन पथ पर अग्रसर हों। माँ दुर्गा सभी को शक्ति, समृद्धि और सुख-शांति प्रदान करें।
जय माता दी!
डॉ इंदु भार्गव जयपुर



