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पट्टीकल्याणा आश्रम में श्रद्धा व स्वाध्याय के साथ मनाई गई आचार्य विनोबा भावे जयंती

 

समालखा लोकेश झा। नज़र इंडिया 24
गांधी स्मारक निधि आश्रम पट्टीकल्याणा में वीरवार को आचार्य विनोबा भावे जयंती के अवसर पर प्रातः श्रमदान पश्चात सायं स्वाध्याय एवं प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। स्वाध्याय में विनोबा की जीवनी अहिंसा की तलाश का पाठन किया गया।

इस अवसर पर संस्था सचिव आनंद कुमार शरण ने संत विनोबा भावे के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि आज जिस महान व्यक्तित्व की जयंती पर हम एकत्र हुए हैं, उनके बारे में आज के युवा कम जानकारी रखते हैं। उन्होंने बताया कि विनोबा जी का जन्म महाराष्ट्र के गागोदे गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम विनोबा नरहरि भावे था। गांधी जी से प्रभावित होकर उन्होंने घर छोड़ दिया और गांधी आश्रम में चले गए। गांधी जी ने उन्हें प्रथम सत्याग्रही घोषित किया। विनोबा भावे को गांधी जी का रचनात्मक उत्तराधिकारी माना जाता है।

भूमिहीनों के लिए भूदान आंदोलन के प्रणेता रहे संत विनोबा भावे को कई भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने धर्मग्रंथों का अध्ययन कर उन्हें सरल भाषा में समाज के सामने प्रस्तुत किया।संस्था की न्यासी हेमलता रावत ने कहा कि यह दिन हम सभी को प्रण लेने का है कि हम महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपना जीवन सरल बनाएं। उन्होंने योग, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया।इस अवसर पर अजय कुमार, सुनीता शर्मा, डॉक्टर संदीप जैन, डॉक्टर रुपाली जैन, गिरिराज, बसंत, रोशन लाल, सोनू, योगेंद्र यादव, प्रसन्न कुमार, राजेश, राहुल, विमलेश, सोनिया, मोनिका, विकास, सोना सहित अनेक साधक-साधिकाएं उपस्थित रहे।

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