शिक्षक दिवस -संस्मरण — संजय कुमार गिरि

बात उन दिनों की हैं जब मैं बारहवीं कक्षा का छात्र था वर्ष 1993 और गौतमपुरी टंकी के पास टेंट वाले राजकीय उच्चतम माध्यमिक विद्यालय गौतमपुरी में पढ़ा करता था ,टीचर- डे 5सितम्बर वाले दिन हमारी क्लास का मोनिटर संदीप चौपड़ा, उस दिन प्रिंसीपल बना और मुझे स्कूल का वाईस प्रिंसीपल बनाया गया । कुछ और विद्यार्थी मित्र थे जिन्हें उनके मन पसंद विषय का अध्यापक बनाया गया और वह अपने अपने फेव. टीचर की नक़ल करते उस दिन स्कूल में आये और कक्षा में जाकर बच्चों को पढ़ाया । यह सब हमारे गुरु भी देख रहे थे उन दिनों हमारे मुख्य अध्यापक साहित्यकार श्री बाल कृष्ण बालेन्दु जी हुआ करते थे । उनका पुत्र सतीश शर्मा भी हमारे साथ ही पढ़ा करता था जो उस दिन पी. टी .आई बना ।
उस दिन हम लोगो ने स्कूल में बच्चों पर इतना कंट्रोल किया कि कोई भी बच्चा बाहर घूमता दिखाई न दिया । उस दिन पूरे आठों पीरियड की पढ़ाई हुई ।सभी अध्यापक हमारी इस व्यवस्था से हम पर बहुत प्रसन्न थे और हमारे लिए नास्ते का भी प्रबंध किया गया ।
उन दिनों हमारे विद्यालय में कुछ शरारती किस्म के बच्चे भी थे जो स्कूल में बदमाशी किया करते थे और हमें बहुत परेशान भी उन में से एक भाई तो बहुत नामी बदमाश भी रहा और बाद में श्याम लाल कालेज में यूनियन का लीडर भी बना,हमारी इस व्यवस्था को बिगाड़ने का उन्होंने बहुत प्रयास किया , हा… हा …हा… हा…. एक ने तो मुझे बाहर देख लेने तक की धमकी भी दे डाली ,
खैर .उस दिन स्कूल में हमें बहुत मजा आया और हमने एक दिन का अध्यापक बन कर अपने मन में बहुत गर्व का अनुभव किया ।
संजय कुमार गिरि
कवि पत्रकार एवम चित्रकार




