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यादगार पल — प्रवीणा सिंह राणा प्रदन्या

 

जीवन में कई ऐसे कई क्षण आते हैं, जो हमेशा हमारे मन और दिल में गहरे उतर जाते हैं। मेरे लिए ऐसा ही एक यादगार पल तब आया, जब मैं अपने परिवार के साथ गाँव गई । उस दिन सुबह का मौसम बेहद सुहावना था। हल्की धूप में हरियाली और ठंडी हवा का मिलन कुछ ऐसा था, जैसे प्रकृति ने अपनी पूरी खूबसूरती हमें समर्पित कर दी हो।

गाँव पहुँचते ही दादी ने हमें अपने पुराने किस्से सुनाए। उनकी बातें सुनते-सुनते ऐसा लग रहा था, मानो हम समय के उन पलों में पहुँच गए हों, जिन्हें उन्होंने बड़े प्यार और अनुभव के साथ जिया था। फिर हम खेतों की ओर गए, जहाँ मैं ने पहली बार अपने हाथों से मिट्टी में काम किया। उस मिट्टी की खुशबू, धूप की गर्माहट और खेत की हरियाली ने मुझे जीवन का एक अनोखा अनुभव दिया।
शाम के समय, हम सब घर के आँगन में बैठकर चाय पी रहे थे। अचानक आसमान में लाल और सुनहरे रंगों की छटा ने हमें मंत्रमुग्ध कर दिया। वह नजारा मेरे दिल में हमेशा के लिए बसा गया। उस समय मुझे एहसास हुआ कि जीवन की खुशियाँ किसी बड़े और महंगे अनुभव में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पलों में छुपी होती हैं।
वापस शहर लौटते समय भी वह दिन मेरी यादों में ताजा था। उस दिन की हँसी, बातचीत, और उन सरल सुखों की मिठास ने मुझे यह सिखाया कि जीवन की सबसे मूल्यवान चीज़ें वह नहीं जो खरीदी जाएँ, बल्कि वह हैं जो अनुभव की जाएँ। आज भी जब मैं व्यस्त जीवन के बीच अपने उन पुराने पलों को याद करती हूँ, तो एक अलग ही शांति और आनंद का अनुभव होता है। यही मेरे जीवन का वह यादगार पल है, जिसे मैं ने हमेशा हृदय में संजो कर रखा है।

प्रवीणा सिंह राणा प्रदन्या

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