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प्रेम की सत्ता:आलेख — डॉ इंदु भार्गव

 

प्रेम, संसार की सबसे गूढ़, लेकिन सबसे सुलभ अनुभूति है। यह केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक ऐसी अदृश्य शक्ति है जो मनुष्य को भीतर से जोड़ती है, संपूर्ण सृष्टि को एक डोर में बांधती है। “प्रेम की सत्ता” का अर्थ है – प्रेम की वह शक्ति, वह प्रभाव, जो जीवन को दिशा, उद्देश्य और गरिमा प्रदान करती है।प्रेम की सत्ता को न कोई देख सकता है, न छू सकता है, फिर भी इसका अस्तित्व हर कोने में अनुभव किया जा सकता है। यह सत्ता एक माँ की ममता में है, एक मित्र की निष्ठा में है, एक साथी के समर्पण में है और यहाँ तक कि ईश्वर की भक्ति में भी यही सत्ता प्रकट होती है। यह न किसी धर्म की बंधन में बंधी है, न जाति, भाषा या सीमा की दीवारों में कैद है।जहाँ प्रेम होता है, वहाँ संघर्ष भी अर्थपूर्ण हो जाते हैं। प्रेम से किया गया कार्य मात्र कर्तव्य नहीं रहता, वह सेवा बन जाता है। प्रेम जीवन की उस नींव की तरह है, जिस पर विश्वास, सम्मान और करुणा जैसे मूल्यों की इमारत खड़ी होती है। यह न केवल मनुष्य को, बल्कि सम्पूर्ण जीव जगत को जोड़ने वाली सबसे शक्तिशाली कड़ी है।इतिहास में भी प्रेम की सत्ता को हमने अनगिनत रूपों में देखा है – चाहे वह मीरा का कृष्ण के प्रति प्रेम हो, राधा-कृष्ण की लीला हो, या फिर महात्मा गांधी का ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के सिद्धांत में निहित प्रेम। प्रेम ही वह शक्ति है जो हिंसा को पराजित करती है, द्वेष को हराती है और द्वंद्व को समाप्त करती है।आज के भौतिकतावादी युग में जब संबंध स्वार्थ से ग्रसित हो रहे हैं, तब प्रेम की सत्ता को समझना और भी आवश्यक हो गया है। प्रेम ही एक ऐसा माध्यम है, जो इस संसार को फिर से मानवता के मार्ग पर ले जा सकता है।

प्रेम की सत्ता वह दिव्य शक्ति है जो जीवन को सार्थक बनाती है। यह सत्ता हमें जोड़ती है, संभालती है और उन्नति की राह दिखाती है। जहाँ प्रेम है, वहाँ ईश्वर का वास है – और जहाँ प्रेम नहीं, वहाँ सब कुछ शून्य है!!
डॉ इंदु भार्गव जयपुर

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