राजस्थान में दवाइयां के नाम पर विक रहा मौत का सामान, जांच में खुलासा नकली दवाइयां में एंटीबायोटिक से लेकर कार्डियक अरेस्ट बीमारी की गोलियां है शामिल

डॉ.चेतन ठठेरा नजर इंडिया 24
जयपुर। राजस्थान में कफ सिरप अर्थात खांसी की दवा पीने से कई बच्चों की मौत का मामला अभी गर्माया हुआ है । इसकी आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई है कि औषधि नियंत्रण विभाग की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसमें एंटीबायोटिक से लेकर कार्डियक अरेस्ट की बीमारी में काम आने वाली दवाइयां सैंपल में फेल हो गई यहां तक की कई दवाइयां के साल्ट भी गायब मिले लेकिन पिछले 1 साल में इन दवाइयां की हजारों गोलियां बेची जा चुकी है इसे यूं कहीं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रदेश में लोगों की जान के साथ दवाइयों के नाम पर खेला जा चुका है । इन दवाइयों का रोगियों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा जिन्होंने उनका सेवन कर लिया है ।
राजस्थान ड्रग कंट्रोलर विभाग के अनुसार प्रदेश में सैकड़ो दवाइयां के सैंपल फेल हुए हैं जिनमें एंटीबायोटिक से लेकर कार्डियक अरेस्ट तक की बीमारी में काम आने वाली दवाइयां शामिल है और आश्चर्य की बात है कि इन दवाइयां का बड़े पैमाने पर लोगों ने उपयोग कर लिया है और कर रहे हैं जबकि कई दवाइयों के सैंपल में दवाई से साल्ट भी गायब मिले हैं। बताया जाता है की दवा नियंत्रण कानून में कई खामियां है जिसका फायदा उठाकर दवा निर्माता कंपनियां आम लोगों की जीवन के साथ खिलवाड़ खेलने और उनकी मौत का खेल खेल रही है ।
जांच में जिन दवाइयां के सैंपल फेल हो गए वह दवाइयां इस प्रकार है
एंटीबायोटिक- जांच मैं इमोक्सीसिलिन, क्लेवूलेनिक, एसिड गोलियां सिप्रोफ्लाक्सासिन,सेफड्राइजोन इंजेक्शन के 6 बैच फेल पाए गए हैं लेकिन जहां से पहले मेडीरिच लिमिटेड की एक लाख से अधिक दवाइयां बिक चुकी है।स्टेराइड- बीटामेथाॅसाॅन, के तीन बेच फेल पाए गए हैं और 5 दिसंबर को रिपोर्ट है लेकिन तब तक मेडिकल बायोटिक 30000 दवाइयां बिक चुकी थी ।एंटी एलर्जिक- लिवोसिट्रोजिन, मोंटेलुकास्ट, के चार बैच सैंपल में फेल मिले और इसकी भी रिपोर्ट 5 दिसंबर को आई लेकिन तब तक थैराविन फार्माल्यूसेशन की 35000 से अधिक दवाइयां बिक चुकी थी।एंटी डायबिटिक – ग्लिमिप्राइड, पायोग्लीटाजोन के तीन बैच फैल थै लेकिन तब तक रिलीफ बायोटेक की 18000 से अधिक दवाइयां बिक गई। इसके अलावा पेन किलर एक्सिक्लोफिनेक पेरासिटामोल के भी तीन बैच फैल पाए गए हैं और इनकी रिपोर्ट 11 दिसंबर को आई परंतु तब तक 20000 से अधिक दवाइयां बिक चुकी थी।
गैस और कैल्शियम की दवाइयां के सैंपल भी हुए फेल
कैल्शियम विटामिन D3 के सप्लीमेंट के आठ बैच के सैंपल फेल पाए गए लेकिन पेट गैस की पीपीआई के 3 बैच फेल पाए गए और इनकी भी हजारों गोलियां बिक चुकी है तथा कार्डियक अरेस्ट में काम आने वाली लोसरटान के दो बैच जांच में फेल हुए इसकी दवा बनाने वाली कंपनी एमेक्स फार्मा के 10000 से अधिक गोलियां बिक चुकी है।
इन दवाइयां से साल्ट भी गायब मिले
जांच के दौरान यह भी पाए गए कि पेट दर्द की दवा से लेकर नाक कान तक की दवा में साल्ट गायब है इंजेक्शन से लेकर फ्लूट तक इनफेक्शियस पाए गए हैं। राजस्थान के कमिश्नर औषधि नियंत्रित की शुभमंगलन के अनुसार अगले दिनो में राजस्थान की 65 दवा बनाने वाली कंपनियों के सघन जांच की जाएगी। नकली दवाइयों को लेकर हम गंभीर हैं।
राजस्थान की ड्रग कंट्रोलर की मिली भगत तो नहीं ?
नियम के अनुसार इन नकली दवाइयां के सैंपल फेल होने पर कोर्ट केस होना चाहिए था लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं हुआ है। इन कंपनियों के सैंपल कोलकाता के सेंट्रल लैबोरेट्री में जांच करवा कर राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पाबंदी लगाने के लिए लिखना था परंतु राजस्थान के सस्पेंड ट्रक कंट्रोलर रिपोर्ट लेकर बैठे रहे। इससे ऐसी संभावना और संध्या पैदा होता है कि प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर की दवा बनाने वाली फार्मा कंपनियो के साथ मिली भगत तो नहीं थी ?
फार्मा कंपनियां क्यों बच जाती है
ऐसी कोई बीमारी नहीं जिसकी नकली दवाइयां राजस्थान के बाजार में नहीं बिक रही हो या पकड़ी नहीं गई हो। लेकिन सरकार कार्य प्रणाली इतनी खराब है कि इन दवाइयां के सैंपल की जांच देरी से आती है और फिर सरकार इन दवाइयां पर रोक लगाने का निर्णय लेती है तब तक यह नकली दवाइयां लाखों की संख्या में रोगियों तक जा चुकी होती है और वह इसका सेवन कर चुके होते हैं जिसके दुर्गगामी प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर आते हैं। इसके अलावा एसी दवाइयां राजस्थान के बाहर दूसरे राज्यों में बनती हैं जिसके लिए केंद्र और दूसरे राज्यों के सहयोग की जरूरत होती है और इसी का फायदा दवा कंपनियों को मिलता है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।




