संस्मरण: यादगार पल संस्मरण– पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम

मनुष्य के जीवन में कई पल आते हैं मगर कुछ यादगार पल बन जाते हैं। जो हमेशा दिल में बस जाते हैं।
मेरे जीवन का यादगार पल मैं भलगाम स्कूल में प्रा.शिक्षक की नौकरी करता था। तब मैं प्रिंसिपल था। 2017 की बात है। हमारे स्कूल ने गुणोत्सव में A ग्रेड प्राप्त किया।बाल साहित्य क्षेत्र में मेरा योगदान था।गुजराती बाल काव्य संग्रह”हिंचके हिंचो” गुजरात राज्य साहित्य अकादमी गांधीनगर की सहायता से प्रकाशित किया था: 2004 में। रमतोत्सव और विज्ञान मेले में भी हमारे स्कूल के बच्चे भाग लेते थे। हमारे बच्चे अच्छा परफॉमन्स था। इस में नंबर आता था। हमने स्कूल के दो खंड बनवाए थे। सैनिटेशन की सुविधा प्राप्त की थी। कंपाउन्ड वॉल बनवाया था। शैक्षणिक और भौतिक सुविधा में हमारे स्कूल के कार्य बहुत अच्छे थे। हमारी छोटी सी स्कूल एक स्वर्ग जैसी लगती थी।जब स्कूल में प्रवेश करते सब शिक्षक मित्रों को खुशी का एहसास होता था। इसीलिए हमारे सुरेंद्रनगर डिस्कीट शिक्षण समिति ने श्रेष्ठ शिक्षक अवोर्ड के लिए मुझे पसंद किया गया। जब मैंने यह न्युज सुना तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा।मन ही मन में ईश्वर का आभार मानने लगा था।
सुरेंद्रनगर ऐवोर्ड लेने के लिए मुझे बुलाया और जब मैंने अवोर्ड स्वीकार किया ये पल मेरे लिए यादगार पल बन गया।
मुझे साल,प्रमाण पत्र,और 15,000 रुपए का चेक देकर सम्मानित किया गया था और मेरी प्रशंसा भी की थी।मुझे बहुत अच्छा लगा था।आज भी प्रमाण पत्र की ओर नजर पड़ती है मुझे ये संस्मरण हो जाता है।
गुजराती बाल साहित्य में रुचि,जिला बेस्ट टीचर अवोर्ड प्राप्त होने से झांझरका से भी श्रेष्ठ शिक्षक सवगुण अवोर्ड भी मिला।शिक्षा में अच्छे कार्य करने के बदौलत। मुझे कईं सम्मान मिले। आज भी हम खुश हैं।
पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’ सुरेंद्रनगर (गुजरात)




