स्वार्थ के चक्कर में — डॉ संजीदा खानम “शाहीन’

आज का मानव स्वार्थ की दौड़ में इस कदर अंधा हो गया है कि उसका मन निरंतर नीचे गिरता जा रहा है। वह अपने स्वार्थ के चक्कर में अच्छे-बुरे का भेद भूलकर सब कुछ नष्ट कर रहा है। ज्ञान के अभाव में वह अपने ही हित का अहित कर बैठता है। अंधविश्वास का मुखौटा पहने इंसान अब मानवता से दूर होता जा रहा है।मानव ने हैवान का रूप धारण कर लिया है, जो अपनी ही जाति – मानवता – को लूट रहा है। अंधविश्वास के जाल में फंसकर वह अपनी संवेदनाओं, सच्चाई और नैतिकता को खो चुका है। जीवन उसके लिए अब बोझिल बन गया है क्योंकि उसने बुद्धि से नहीं, भ्रम से जीवन जीना शुरू कर दिया है। झूठे दिखावे और आडंबरों के चक्कर में इंसान ने अपने जीवन को खोखला कर लिया है।
अंधविश्वास की इस दुनिया में वह नकारात्मक विचारों को बढ़ावा दे रहा है। उसे यह भी भूल गया है कि इस संसार का मालिक ईश्वर है, जो सब कुछ संचालित करता है। पाखंडी, झूठे और मक्कार लोगों की बातों में आकर इंसान अपने घर-परिवार, शांति और सुख सब दांव पर लगा बैठा है। वह खुशियों के असली मायने भूलकर अंधविश्वास के दलदल में धंसता जा रहा है। इस स्वार्थ और अंधविश्वास की अंधी दौड़ में मानवता, विवेक और सच्ची आस्था का ह्रास हो रहा है।
डॉ संजीदा खानम “शाहीन’




