विषय जीवन के संघर्षों से आत्मसुधार– डॉ संजीदा खानम शाहीन

विधा लघु कथा
जीवन के संघर्षों से आत्मसुधार की और अग्रसर होना निहायत जरूरी है।
और आवश्यक भी है ।हमारे जीवन में कही पहलू ऐसे आते है ।हमें चुनाव करने में बड़ी मुश्किल आती है हम
सोच विचार में ही रह जाते है कि क्या करे क्या न करे।
लेकिन जीवन और जिंदगी आगे बढ़ते जाते हैं।एक एक पल कीमती होता है जिंदगी का यह कहना उचित है कि समय अनमोल होता है किसी के लिए नहीं रुकता ,और समय निरंतर गतिमान है ।
हम है, हमारा होना हमारी पहचान जीवन में दर्शाने के लिए हमें कुछ ऩ
कुछ ऐसा काम करना होता है जो प्रेरणा से ओतप्रोत हो। जैसे कि
कुछ बड़ी सफलता अच्छी जिंदगी के लिए ,प्रयास करने होते हैं ।
हम रुक नहीं सकते जीवन की परिस्थितियों में चाहे दुख हो ,या सुख हो ,आगे बढ़ना जीवन है ।
गुलाब नाम की लड़कीके जीवन में भी पढ़ाई को लेकर बहुत चुनौती आई महिलाओं को अधिकतर चुनौतियां आती है, परिवार की भी ,सुसराल की भी रिश्तेदारों और समाज की भी ,आई लेकिन गुलाब सोच,ज़िद की पक्की और मजबूत इरादों की धनी चट्टान से हौसले , जीतने का जुनून अपनी मंजिल की और बढ़ना ही जीवन का लक्ष्य मानती गुलाब खूब जिंदगी की जंग को बहादुरी से लड़ी ,संघर्ष किया और आज एक सफल नागरिक बनी देश को सेवाएं समर्पित समाज सेविका
पी एच डी होल्डर एम डी एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट
सफल साहित्यकारों में पहचान बनाई जब गुलाब कर सकती है तो आप और हम क्यों नहीं कर सकते है। बस हिम्मत, हौसला प्रयास मेहनत करते रहिए आगे बढ़ते रहिए।
जानना चाहेंगे गुलाब कौन है गुलाब किरदार है डॉ संजीदा खानम शाहीन का । जो सायरा ,लेखिका कवयित्री में अपनी पहचान ओर कीर्तिमान स्थापित नियमित साहित्यिक सेवाएं देकर स्थापित कर रही है निरंतर प्रत्येक दिन बिना थके ,बिना रुके ।
डॉ संजीदा खानम शाहीन



