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आज मैं स्वयं से मिली हूँ — शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’

 

आज मन असाधारण रूप से आत्मविश्वास से भरा है…
वजह यह नहीं कि मैंने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की,
बल्कि इसलिए कि आज पहली बार मैंने अपने मन की की —
बिना इस भय के कि कोई मुझसे नाराज़ हो जाएगा।

मैं स्वभाव से अत्यंत भावुक हूँ —
संबंधों को टूटने से बचाने के लिए सदा झुकती रही,चाहे दोष मेरा हो या नहीं,
हर बार अपनी ही भावनाओं को कुचलकर दूसरों को प्रसन्न करती रही।

पर आज एक नया बोध हुआ है —
झुकने की आदत हमें विनम्र नहीं, कमज़ोर बना देती है।जो लोग स्वयं ग़लत होते हुए भी हमें अपराधबोध में धकेल देते हैं,वे दरअसल हमारी संवेदनशीलता का लाभ उठाते हैं।पिछले कुछ दिनों से जब मैंने अपना ध्यान अपने कार्यों में लगाया,तो पाया कि मन अधिक शांत और संतुलित है,और जो लोग सदा मेरे ऊपर छाए रहते थे, वे धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे हैं मेरे जीवन में।
आज जब किसी ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार झूठ बोलकर मुझे फिर से दोषी ठहराने की कोशिश की,तो पहली बार मेरे मन में भय नहीं, साहस उठा।
मैंने स्पष्ट कह दिया, अब मुझे इस संबंध के बिगड़ने की परवाह नहीं,क्योंकि अपने स्वाभिमान से बड़ा कोई संबंध नहीं हो सकता। आज मैंने सिर झुकाकर नहीं,
सिर उठाकर निर्णय लिया है। और इस क्षण मुझे महसूस हो रहा है, मैंने सिर्फ़ एक निर्णय नहीं लिया,मैं आज स्वयं से मिली हूँ।
शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’

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