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आखिर गलती किसकी सज्जा किसी और को क्यों – नीलम सोनी

 

जिंदगी में गलतियां मनुष्य के जीवन में बहुत होती है।उसमें सुधार भी किया जाता है।पर कभी कभी ऐसी गलती कर बैठता किसी और की जिंदगी खराब कर देता है। कभी कभी जिंदगी मे ऐसे मोड आते है। गलती किसी और की होती है। पर सज्जा किसी और को ऐसी मिलती है। उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद करके छोड़ देती है। आज आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रही हु।इसे केवल एक कहानी का रूप दिया हैं । उसकी पूरी दुनिया एक कहानी बनकर रह गई। ये कहानी है पूजा नाम की लड़की थी। मध्यम परिवार से थी ।कम ही पढ़ी लिखी थी शादी की उम्र में घर वालो ने शादी कर दी। पीहर परिवार वालों जिम्मेदारी समझ के बेटी की शादी की परम्परा निभाई । पर कुछ ससुराल वाले दुनिया मे ऐसी सोच वाले मिलते है ।ससुराल वालों ने ये सोच लिया। हमने खरीद लिया।अब इच्छा हो जैसे रखेंगे। पूजा शादी करके आई।कुछ समय बाद 2 बच्चे भी हो गए । कभी कभी पति से छोटी छोटी बातों पे झगड़ा शुरू हो गया घर मे। पति का बाहर किसी औरत से चक्कर चलने लग गया । घर में आए दिन झगड़े शुरू हो गए। पति बोलता में उसे शादी करूंगा तु निकल यहां से पति के मा बाप वो भी अपने बेटे का पक्ष लेते । बेटा एक क्या दस ला सकता। तुझसे देखा नहीं जाता तो अपने पीहर जा। पीहर जाके ये बात अपने माता पिता भैया को कहा तो सबने यही कहा। हमारे पास इतना नहीं है तुझे और तेरे बच्चों को अपने पास रख के पूरी जिंदगी खर्चा उठा सके। वापस से अपने ससुराल ही जाओ। जैसे भी रहना तुझे वही है। पूजा वापस अपने ससुराल आई। सबसे मदद की भीख मांगी कोई तो उसका साथ देवे ।सबसे यही कह के सांत्वना दी।भगवान पर छोड़ दी। किस्मत मे जो लिखा होगा वो होगा। पर किसी ने गलत का विरोध नहीं किया। पूजा के पति ने दूसरी शादी कर ली। आज एक ही घर में दोनों पत्नियां रहती है। एक को ऊपर ऊपर कमरा दे रखा।उसमें अलग खाना खुद के बच्चों के बनाओ। जब कभी पैसे की जरूरत होती एक पैसा देता नहीं ।आए दिन पूजा बच्चों को मारता रहता है। मन हो तो उसे उसके बच्चों का खर्चा उठता।पैसे देता वरना नहीं देता। पूजा से अब उसका कोई लेना देना नहीं। घर वालो ने भी दूसरी बहु को स्वीकार कर लिया। आज आप सभी से ये बात जानना चाहूंगी ।इस कहानी में गलती किसकी थी। पूरी जिंदगी खराब किसकी हुई। क्या दुनिया मे समाज के डर से कुछ परम्परों से बंधे लोग क्या बोलंगे ।किसी की जिंदगी बर्बाद कर देते है। क्यों केवल एक पुरुष को जीने का हक होता है। मन मर्जी करने का हक होता है।औरत को जीने का हक नहीं होता है क्या। उसकी जिंदगी केवल दुख सहने करने के लिए होती है क्या। उसके सपने इच्छाएं नहीं होती है क्या। एक बेटी बन के पिता के घर पली बढ़ती ।उसे केवल एक जिम्मेदारी नहीं माने । शादी करते वो पराई हो गई। उसे अपने पैरों पे खड़ा होना सिखाए।
जिंदगी में कभी भी किसी परिस्थिति आ जाए जीवन में। किसी सहारा की जरूरत ना पड़े।
नीलम सोनी

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