दहेज हत्या केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, जमानत रद्द, आरोपी को समर्पण का आदेश शादी पवित्र बंधन, सौदा नहीं, दहेज प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुमित कुमार बैरवा। नजर इंडिया 24
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में आरोपी पति की जमानत रद्द करते हुए दहेज प्रथा पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि दहेज की बुराई के कारण शादी का पवित्र बंधन दुर्भाग्य से एक कारोबारी लेन-देन बनकर रह गया है।जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर. महादेवन की बेंच ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से जुड़े इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमानत आदेश को विकृत और अस्वीकार्य बताते हुए आरोपी योगेंद्र पाल सिंह को तुरंत समर्पण करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि विवाह आपसी विश्वास, साथ निभाने और सम्मान पर आधारित पवित्र संस्था है, लेकिन दहेज जैसी कुप्रथाएं इसे सामाजिक प्रतिष्ठा और लालच का साधन बना रही हैं। बेंच ने चेतावनी दी कि दहेज के कारण होने वाली मौतें न केवल महिलाओं पर अत्याचार हैं, बल्कि ये समाज की नैतिकता को भी खोखला कर रही हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की न्यायिक नरमी अपराधियों को बढ़ावा दे सकती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, देश में हर साल हजारों दहेज मौतें दर्ज होती हैं, जो सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाती हैं।




