हमारे त्यौहार — सुनीता तिवारी

भारत विविधताओं का देश है,
यहाँ भाषाएँ बदलती हैं पहनावे बदलते हैं पर दिलों में प्रेम की भावना एक है।
यही एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। चाहे उत्तर का हिमालय हो, दक्षिण का सागर तट, पूर्व का सूर्योदय हो या पश्चिम का मरुस्थल,
हर कोने में भारत की आत्मा बसती है।
हमारे त्यौहार इस एकता को और मजबूत बनाते हैं।
दीपावली,ईद,क्रिसमस,गुरुपर्व,होली,रक्षाबंधन,ओणम, बिहू,बैसाखी
ये सब सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आपसी प्रेम और साथ रहने के प्रतीक हैं।
जब दीप जलते हैं तो केवल घर रोशन नहीं, दिल भी रोशन होते हैं।
जब रंग उड़ते हैं तो सीमाएँ मिट जाती हैं।
त्यौहार हमें सिखाते हैं कि भले ही हमारे रीति-रिवाज़ अलग हों, हमारी संस्कृति की जड़ें एक ही हैं,
मानवता और आपसी सम्मान।
भारत की अखंडता इसी भावना से जीवित है।
जब हम एक-दूसरे के त्यौहार में शामिल होते हैं तो वह दृश्य अपने आप में भारत की असली तस्वीर बन जाता है।
रंगों से भरी, खुशियों से सजी और प्रेम से जुड़ी।
इसलिए कहा गया है,
अनेकता में एकता,यही भारत की पहचान है
हम सब मिलकर इस परंपरा, संस्कृति और एकता की लौ को सदा जलाए रखें, यही सच्चा देशप्रेम है।
सुनीता तिवारी



