लेखन एक यात्रा है — अनीता चतुर्वेदी (ग्रेटर नोएडा)

कभी एकाकी, कभी संघर्षपूर्ण, कभी अत्यंत सुखदायक।
मैं भी अपनी कलम को सँभाले इस राह पर चल रही थी, लेकिन जो ठहराव, जो संबल, जो अपनापन मुझे लेखनी मंच ने दिया, वह मेरे रचनात्मक जीवन की सबसे अनमोल पूंजी बन गया।
लेखनी मंच मेरे लिए सिर्फ एक साहित्यिक समूह नहीं रहा,
यह तो मानो एक विस्तृत परिवार की तरह मेरे पास आया,
जहाँ शब्दों को अर्थ मिले, रचनाओं को प्रोत्साहन मिले
और भावनाओं को वह ऊष्मा मिली, जिसकी तलाश वर्षों से थी।
जब भी मन संकोच में घिरता,
जब भी लगता कि मेरी रचना शायद पर्याप्त नहीं,
उसी क्षण मंच के साथियों की स्नेहभरी प्रतिक्रियाएँ
मेरी थकी हुई प्रेरणा को फिर से जगातीं।
उनके हर “बहुत सुंदर”, “वाह”, “क्या अभिव्यक्ति है”…
जैसी प्रतिक्रियाएं..
मेरे भीतर सोयी हुई नयी ऊर्जा को जगा देते।
लेखनी मंच ने मुझे सिखाया
कि लेखन सिर्फ शब्दों का संयोजन नहीं,
यह रिश्तों का ताना-बाना भी है।
यहाँ हर रचनाकार दूसरे की रचना को
अपने हृदय से पढ़ता है,
और वही भावपूर्ण सहभागिता
मेरे लेखन को नई दिशा देती चली गई।
इस मंच ने मेरी कलम को परिपक्व किया,
मेरी सोच को विस्तृत,
और मेरी भावनाओं को विनम्र।
मैंने यहाँ सीखा कि संवेदनाएँ जितनी गहरी हों,
साहित्य उतना ही जीवंत होता है।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ,
तो पाती हूँ कि मेरी हर रचना में
लेखनी मंच की एक कोमल छाप है..
साथियों का स्नेह,
मंच की गरमाहट,
औरलेखनी परिवार का अनकहा अपनापन
जिसने मेरी कलम को सिर्फ दिशा नहीं दी,
बल्कि पहचान भी दी।
लेखनी मंच मेरे लेखन की धड़कन बन गया है,
प्रेरणा का वह स्रोत बन गया है,
जो हर नए शब्द के साथ मेरे भीतर मुस्कुराता है।
यदि आज मेरी कलम कुछ कह पाती है,
तो उसमें इस मंच की स्नेहिल भूमिका
सदैव अंकित रहेगी।
अनीता चतुर्वेदी
(ग्रेटर नोएडा)




