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मामादेव जी मंदिर में 23वीं वर्षगांठ व चतुर्थ सामूहिक विवाह सम्मेलन में भक्ति, उल्लास और सामाजिक समरसता का अनूठो संगम

 

कालागुन/ पुष्पा सोनी

कालागुन। श्री मामादेव जी मंदिर प्रांगण में रविवार, 2 नवम्बर 2025 को मंदिर की 23वीं वर्षगांठ एवं ओबीसी सर्वसमाज द्वारा आयोजित चतुर्थ सामूहिक विवाह सम्मेलन बड़ी ही धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही मामादेव नगर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, मंदिर परिसर आरती, भजन और जयकारों से गूंज उठा।सूरतपुरा से मामादेव मंदिर तक ठाकुरजी की भव्य बारात निकाली गई। घोड़े और ऊँटों पर सजे ठाकुरजी की बारात का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। भक्तगण नाचते-गाते, गीत-संगीत की स्वर लहरियों के साथ इस धार्मिक यात्रा में शामिल हुए। ठाकुरजी आगे-आगे और सभी जोड़े उनके पीछे श्रद्धाभाव से चल रहे थे। पूरा वातावरण भक्ति और आनंद से परिपूर्ण हो उठा।

मंदिर प्रांगण में तुलसी विवाह का शुभ अनुष्ठान विधिवत वैदिक रीति से सम्पन्न हुआ। तुलसी माता और शालिग्राम भगवान के दिव्य विवाह के साथ वातावरण में “जय श्री विष्णु” और “जय तुलसी माता” के जयघोष गूंज उठे। इसके साथ ही ग्यारह जोड़ों का सामूहिक विवाह भी परंपरागत विधियों के अनुसार सम्पन्न हुआ। समाज के भामाशाहों और दानदाताओं ने आगे बढ़कर कन्यादान की पावन परंपरा निभाई और नवदंपतियों को आशीर्वाद प्रदान किया। पंडितजनों ने पूरे विधि-विधान के साथ विवाह संस्कार संपन्न करवाए और मंगल गीतों से वातावरण को पवित्र बना दिया।समाज के अनेक दानदाताओं ने इस अवसर पर आर्थिक सहयोग प्रदान कर सराहनीय योगदान दिया। आयोजन स्थल पर जल, भोजन और समुचित व्यवस्था की उत्तम तैयारी रही। प्रीतिभोज में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और आयोजन को और भी भव्य रूप दिया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में किंग ग्रुप भीलवाड़ा, संचेती परिवार पाली, किशोरसिंह मेवाड़ा अडको का पीपलिया एवं देवीलाल मेवाड़ा कालागुन उपस्थित रहे। मंच संचालन में समाज के वरिष्ठजनों ने कुशलता से भूमिका निभाई। श्री मामादेव सेवा संस्थान एवं समस्त भक्तगण, भामाशाहों के अथक प्रयासों से यह आयोजन एक भव्य उत्सव के रूप में सफल हुआ।मामादेव जी मंदिर की यह वर्षगांठ एवं सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता की मिसाल बन गया। सभी वर्गों और समाजों के लोगों ने मिलकर इस आयोजन में भाग लिया और यह संदेश दिया कि संगठित समाज ही सशक्त समाज होता है। पुष्पवर्षा, भक्ति संगीत, और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच सम्पन्न हुआ यह समारोह उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

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