नया जमाना — उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

नया जमाना अर्थात नया युग में वर्तमान पीढ़ी पुरानी रीति रिवाजों को बिल्कुल भूल चुकी है।बात आती है चिट्ठी पत्री की आज कल के बच्चे चिट्ठी का प्रेम जानते ही नहीं चिट्ठी लिखना ही नहीं जानते जब चिट्ठी आती थी तो घर में सभी बड़े खुश होते थे कहां से चिट्ठी आई है और चिट्ठी को बड़े प्रेम से पढ़ते थे आज वह पत्र का प्रेम बिल्कुल ही छूट गया। मोबाइल ने पत्रों का प्रेम छीन लिया।
जब पहले घरों में चाकी चलाईं जातीं थीं महिलाएं सुबह-सुबह प्रातःकाल चाकी चलाया करतीं थीं जिससे शरीर भी स्वस्थ रहते थे, अब चक्की से पिसकर आटा आता है तभी तो महिलाओं को गठिया थाइराइड आदि बीमारियां हो रहीं हैं।
पहले घरों घरों में गाय भैंस पालीं जातीं थीं उनका दूध मट्ठा मक्खन घर पर होता था जिससे शरीर को शक्ति मिलती थी।आज के समय में सभी आलसी हो गये है गाय भैंस पालीं ही नहीं जातीं।घर में कुत्ते पाल लेते हैं तभी कुत्तों की तरह भोंकते रहते हैं मां बाप की इज्जत आदर सत्कार नहीं करते उनकी सेवा तो दूर रही उनको घर में रखना भी नहीं चाहते। आजकल के रहन सहन खाना पीना पर हमें शर्म आती है कि मेरा कैसा भारत बर्ष था और अब कैसा हो गया सभी अपना काम भूल गये।
पहले शादी विवाह के समय में कितने सुंदर सुंदर लोकगीत गाये जाते थे अब तो कुछ देखने में ही नहीं आता विवाह के समय सीढ़ी से गाने लगा दिए उनपर नाचते रहते हैं बस और कुछ नहीं रहा।
लोकगीतों का वह आनंद ही लुप्त होता जा रहा है।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।




