Uncategorized

सिंदूर — प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मसम्मान का लाल वचन। सुनिता त्रिपाठी’अजय’

 

सिंदूर मेरे लिए सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का वह लाल संकेत है जो एक स्त्री के प्रेम, उसकी जिम्मेदारी और उसके आत्म‑सम्मान को एक साथ जोड़ता है। सिंदूर की सुंदरता उसके रंग में नहीं, बल्कि उस भावना, उस विश्वास और उस गरिमा में है, जिसे पहनने वाली स्त्री अपने भीतर संभाल कर चलती है। बहुत लोग इसे केवल “विवाह का चिह्न” कह कर सीमित कर देते हैं, पर सिंदूर का अर्थ इतना छोटा नहीं है। एक छोटा‑सा लाल कण स्त्री के भीतर बसे समर्पण, विश्वास और भावनाओं की गहराई को दर्शाता है। यह रंग सिर्फ माथे पर नहीं लगता; यह दिल पर लिखी जिम्मेदारियों और प्रेम का प्रतीक बन कर चमकता है। मेरी नज़र में, सिंदूर लगाने का अर्थ यह नहीं कि स्त्री किसी पर निर्भर है— बल्कि यह वह क्षण है जब वह अपने जीवनसाथी के साथ खड़े प्रेम, भरोसे और साझेदारी को सम्मान के साथ स्वीकार करती है। आज की पीढ़ी अक्सर इसे पुरानी सोच मान लेती है, शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने वह भावना महसूस नहीं की, जो सिंदूर लगाते समय स्त्री के भीतर उठती है। परंपरा तभी सुंदर होती है जब वह मन से स्वीकार की जाए, न कि दिखावे या दबाव से।
सिंदूर तभी सार्थक है जब वह किसी सामाजिक मजबूरी से नहीं, बल्कि स्त्री की अपनी इच्छा, अपने निर्णय और अपने स्वाभिमान से उसके माथे पर सजे। स्त्री की स्वतंत्रता और उसकी गरिमा— यही सिंदूर का वास्तविक अर्थ है।
यह लाल कण मेरे लिए सिर्फ रंग नहीं, बल्कि जीवन के गहरे शब्द हैं: प्रेम, विश्वास, गरिमा और ज़िम्मेदारी। यह उस स्त्री की मौन शक्ति है जो परिवार को सहज रखती है, रिश्तों की गर्माहट बचाती है और कठिन समय में भी धैर्य से खड़ी रहती है। कई बार यह केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि मन की स्थिरता का स्रोत बन जाता है। नई पीढ़ी की लड़कियों से मैं यही कहूँगी— सिंदूर लगाना या न लगाना आपका अधिकार है, पर अगर लगाएँ, तो वह आपकी पसंद, आपके स्वाभिमान और आपके शुद्ध प्रेम का प्रतीक बने। क्योंकि सिंदूर की असली चमक उसके लालपन में नहीं, बल्कि उस स्त्री की मजबूती, संवेदनशीलता और गरिमा में बसती है, जो उसे सम्मान से धारण करती है।
और इसी सत्य को एक पंक्ति में कहा जा सकता है।
सिंदूर सौभाग्य‑श्रृंगार का प्रतीक ही नहीं, बल्कि एक स्त्री की जीती‑जागती गरिमा, उसका भरोसा और उसका आत्म‑सम्मान है।
यह वही लाल वचन है जो मन को जोड़ता है, घर में शुभता भरता है और जीवन को एक पवित्र, स्थिर और सुंदर अर्थ देता है।

सुनिता त्रिपाठी ‘अजय’, जयपुर, राजस्थान

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!