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गुरु गोविंद साहब के साहबजादों की लासानी शहादत देखकर मौत भी आँसू बहा रही होगी। अमनवीर सिंह धामी

जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज,उ.प्र. काव्य-समूह की आभासीय काव्य-गोष्ठी संपन्न।देश-विदेश से कवि/कवयित्रीवृंद ने शिरकत की।

प्रयागराज उ.प्र.की ख्यात-नाम कवयित्री श्रीमती जगदीश कौर के संयोजन में संचालित काव्य-समूह “जगदीश साहित्य संस्थान द्वारा विगत दिवस,सिख इतिहास में 22दिसंबर से 26 दिसंबर तक प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले सप्ताह के तत्वावधान में,गुरु गोविंदसिंह जी के चार साहिबज़ादों की लासानी शहादत को समर्पित काव्य-गोष्ठी “गूगल-मीट” के माध्यम से दिनाँक 15 दिसंबर ’25 को सायं 05 बजे से 09 बजे तक संपन्न हुई।इस गोष्ठी में विदेश तथा देश के विभिन्न प्रांतों के नामचीन कवि/कवयित्रीवृंद नें अपने स्वरचित काव्य-सृजन के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह जी को व उनके चार साहिबज़ादों की लासानी शहादत को स्मरण करते हुए उन्हें अपनी “काव्य-श्रद्धाँजली” नम आँखों से प्रस्तुत की।
काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता “आस्ट्रेलिया” से शामिल भारतीय मूल के कविवर “अमनवीर सिंह धामी जी” ने की।
गोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रुप में दिल्ली की सुविख्यात कवयित्री श्रीमती एनिमेश्वर कौर जी उपस्थित रहीं।
गोष्ठी में सरस्वती वंदना,प्रतापगढ़ उ.प्र.की कवयित्री श्रीमती किरण अग्रवाल जी ने तथा “शबद-गायन” श्रीमती अमरजीत कौर मोरिण्डा जी द्वारा किया गया।
प्रयागराज के कवि श्री “सूरजकाँत जी” द्वारा किए गए उपस्थित अतिथियों के स्वागत भाषण के बाद “श्री मनमोहन सिंह ‘तन्हां’ जी द्वारा विषयांतर्गत लासानी शहादत की जानकारी देते हुए बताया गया कि “गुरु गोविंद सिंह जी के पिता जो मानव धर्म की रक्षा हेतु 11 नवंबर 1675 को शहीद हुए, उससे पहले उनके तीन गुरसिख भाई सतीदास जी,भाई-मतीदास जी एवं भाई दयाला दास जी 22 दिसंबर को “चमकौर की जंग में,दो बड़े साहिबजादे,तीन प्यारे और कई गुरसिख भाई,26 दिसंबर को दो छोटे साहिबजादे,माता गुजरी जी,फतेहगढ़ साहिब में शहीद हुए।
इस लासानी शहादत की मार्मिक जानकारी से अवगत होकर उपस्थित कवि/कवयित्रीवृंद की आँखे भर आईं व उनके सिर श्रद्धा से झुक गए।

कवि-गोष्ठी का संचालन मंच/पटल की संचालिका कवयित्री श्रीमती जगदीश कौर द्वारा किया गया।

काव्य-गोष्ठी में अध्यक्ष श्री अमनवीर सिंह धामी जी ने अपनी काव्य-रचना द्वारा एक बार पुन:इस इतिहास को दुहराते हुए कहा कि “इस लासानी शहादत को देखकर एक बार मौत की आँखों से भी आँसू झर रहे होंगे।
काव्य-गोष्ठी में अध्यक्ष श्री धामी जी के अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि श्रीमती एनिमेश्वर कौर,किरन अग्रवाल,सूरजकाँत, सोमेश्वर तिवारी, संतोष श्रीवास्तव विद्यार्थी”सागर म.प्र., महेश भट्ट, ग्वालियर म.प्र.,मंजूषा दुग्गल, डाॅ.राजेश तिवारी झाँसी.उ.प्र.,डाॅ.रामनिवास तिवारी”आशुकवि”म.प्र.,बिंद्रावन राय “सरल”,शायर सागर म.प्र.,डाॅ.बी.एल सैनी,देवीदीन अविनाशी,वैशाली रस्तोगी,एड.सुनील श्रीवास्तव “बेचारा”,मयंक कुमार पटना ,अवधेश श्रीवास्तव “उन्नाव,किरन अग्रवाल, ओमप्रकाश द्विवेदी और अनेक कवि/कवयित्रीवृंद ने अपने काव्य-श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।
अंत में कवि संतोष श्रीवास्तव “विद्यार्थी”सागर द्वारा काव्य सम्मेलन के संबंध में की गई संक्षिप्त विवेचना व कवी सूरजकाँत जी द्वारा सभी अतिथियों एवं कवि/कवयित्रीवृंद के प्रति किए गए आभार प्रदर्शन के साथ रात्रि 09 बजे काव्य-सम्मेलन समाप्ति की घोषणा की गई।
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