हमारी भावनाओं में किसका नियंत्रण है -हमारा या किसी और का — भूमिका शर्मा

जीवन कहता है भावना जो मन की है वह हमारी है।हमारी भावना हमारे जीवन का अंश हैव
मृदुल वचन और कोमल हृदय। जीवन के सफर में है भावना हमारी जुड़ी।जुड़ाव दुसरो से है।भावना पर नियंत्रण हमारा है।
जीवन कहता है घृणा मत कर।दयाभाव है हमारे मन की भावना।आदर और शिष्टाचार का भाव हमारे अंदर का भाव है। हाँ दूसरों के प्रति होता है।पर भावना दूसरे नहीं देते।वह हमारे मन की होती है।पल जीवन प्रतिकूल और प्रगतिशील होता है।
मानव जीवन की भावना है मुस्कराहट की भावना। वह हमारे अंतरमन की भावना है।
भावना हमारी हो अपनेपन की।प्रेम की भावना का है रास्ता।कटुता का नहीं है।अपने वचन से पक्के होने की भावना।
अच्छी भावना से बनते नेक विचार।अपनी राह की सोच से जीवन बनता परिपूर्ण ।जीवन बनता है सफल।
भावना पर नियंत्रण हमारे हाथ में है और दूसरों के नहीं।
-भूमिका शर्मा
शिक्षिका और लेखिका
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)




