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साल 2025 के संग बातें — बबीता शर्मा

 

भाईसाहब तुम्हे शत शत नमन ।
तुम्हे कोटि कोटि धन्यवाद ।
तुमने अपने जीवन का बहुत ही मूल्यवान समय है मुझे दिया ।
साल2025,”नहीं नहीं बहन ऐसा कहकर मुझे शर्मिंदा न करो ये तो मेरा फर्ज था ।मैं उस भारत का निवासी हूं जो सदा से देवो की पावन भूमि रही है ।”
भाईसाहब मैं आपकी इस श्रद्धा के लिए आपको बार_बार प्रणाम करती हूं। लेकिन अब मुझे बड़े दुख के साथ आपको कहना पड़ रहा है कि अब इस पावन मिट्टी में लोभ के व्यापारी जन्म ले चुके है जो अपने लाभ अर्जन हेतु प्रकृति की बलि चढ़ा रहे है इतना तो फिर भी ठीक था कि आम जनता ही बलि चढ़ रही थी लेकिन भाईसाहब अब तो नीचता की अति हो गई दरिंदो ने देश की सुखदायिनी ,जीवन वरदायिनी ,प्राणों की प्रहरी , वन्य जीवों को आश्रय देने वाली अरावली श्रृंखला को भी नहीं छोड़ा उसे भी निगल रहे है .…….
इतना सुनकर 2025 भैया बड़े ही क्रोधित हुए उनकी आंखों से आग की ज्वाला बरसने लगी मेरे आंसू पूछते हुए कहा कि बहिन चिता न करो ये सूचना मैं अपने आदरणीय भाई 2026को अवश्य दूंगा गर वो कहर बन कर उन पर न टूटे तो कहना । मेरा समय पूरा हुआ तो क्या हुआ क्योंकि मुझे अभी किसी आवश्यक कार्य से चित्रगुप्त से मिलने जाना है वह भी मै इस विषय पर चर्चा अवश्य करूंगा ।
मैने हाथ जोड़ कर भाईसाहब को सादर नमन किया । मैने उन्हें अलविदा नहीं कहा समय कभी नहीं मरता उसका पुनर्जन्म फिर होगा और नए रूप में फिर से दर्शन होंगे ।पापियों को उनके पाप का दंड अवश्य मिलेगा ।
भाईसाहब 2025 ने बड़ा ही अच्छा परिणाम मुझे सुनाया और साथ ही सुभाशीष भी दिया ।
नमन है भाईसाहब को ।

बबीता शर्मा

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