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वरदायिनी माँ शारदा — अशोक पटसारिया नादान

वरदायिनी माँ शारदा,मंगल करो मंगल करो l
स्वर साधना का ज्ञान दो,मन भावना उज्ज्वल करो ll
जानूँ नहीं शब्दार्थ को,मन भाव की अतिरंजना l
श्री छंद की जादूगरी,रस छंद की अभिव्यंजना ll
पिङ्गल नहीं आता मुझे,या मंत्र कोई जापका l
तत्स्म नहीं हम जानते,तद्भव न देशज आपका ll
अब कंठ में बैठो सदा,स्वर साधना पक्की करो l
वरदायिनी माँ शारदा,संकट हरो-संकट हरो ll
जंगल खड़ा है शब्द का,सुंदर सृजन कैसे बनें l
भाषा विभाषा शब्द हैं,तो प्रेम रस कैसे सनें ll
रचना मधुर सुर ताल में,लय बद्ध हो ऐसा करो l
वरदायिनी माँ शारदा,संकट हरो-संकट हरो ll
इतना मधुर देना गला,श्रोता सुनें जब गान को l
अर्पित करूँ कुछ पुष्प में,माँ आपको भगवान को ll
दे दो शरण नादान को,इस दास का मङ्गल करो l
वरदायिनी माँ शारदा,संकट हरो-संकट हरो ll
अशोक पटसारिया नादान




