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“हर दिल में बसते हैं राम” — प्रवीणा सिंह राणा प्रदन्या

 

हर दिल में बसते राम,
सकल जगत के वे ही धाम।
उनका नाम जपें तो मन में,
उठता पावन एक अरमान।
हर दिल में बसते राम…

भटके मन को राह दिखाएँ,
असमझते जीवन का सार।
राम सुमिरन से मिट जाता
साब भय और अंधकार।
हर दिल में बसते राम…

राम बिना क्या जीवन मेरा,
राम ही मेरे प्राण,
उनकी छाया तले सदा ही
रहता जग कल्याण।
हर दिल में बसते राम…

सीता-राम का नाम अनोखा,
सबका करे उद्धार,
जो भी एक बार पुकारे,
राम करें भाव-पार।
हर दिल में बसते राम…

प्रवीणा सिंह राणा प्रदन्या

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