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अहसान – शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’

 

करोना काल में सभी घरों में बंद रहकर ही अपनी जीविका अर्जित कर रहे थे। प्रेरणा का भी आफिस घर से ही चल रहा था। वो समय सभी के लिए मुश्किल भरा ही रहा। प्रेरणा भी कोविड का शिकार हुई। अस्पताल जाना, इलाज करवाना भी उस दौर में एक खतरा बना हुआ था सबके लिए। प्रेरणा को भी अस्पताल में क्वारंटाइन किया गया। दस दिन तक अस्पताल भर्ती रही। वापिस आने के बाद भी कई दिन कमजोरी महसूस होती रही। धीरे धीरे वापिस काम शुरू किया। सबसे घर बैठे ही संपर्क हो रहा था। तभी उसे पता चला कि उसके बॉस को भी करोना हुआ है। उसने उनकी तबीयत की जानकारी लेने के लिए फोन किया तो उनकी पत्नी ने बताया कि वो अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें पहले से ही सांस की तकलीफ़ होने के कारण उनकी हालत गंभीर है। प्रेरणा के बॉस दो महीने बाद रिटायर होने वाले थे। और प्रेरणा उनके सब पेंशन पेपर्स तैयार करवा रही थी। बॉस की पत्नी से संपर्क में थी। तभी पता चला बॉस को बहुत कमजोरी के कारण खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ रही थी। प्रेरणा ने जल्दी से अपने आफिस के सभी लोगों से संपर्क करके खून की व्यवस्था करवाई। बॉस की पत्नी भी प्रेरणा से ही मदद लेती रही। उधर उनका बेटा जो विदेश में था, वो भी प्रेरणा से ही संपर्क करके सब जानकारी लेता और आगे की कार्रवाई के बारे में बात करता। प्रेरणा ने हर संभव कोशिश करके बॉस के परिवार की मदद की और मुश्किल समय में उनका सहारा बनी रही। अस्पताल से स्वस्थ होकर जब बॉस वापिस आए तो प्रेरणा से संपर्क किया और उसका बहुत अहसान जताया कि उसने इस मुश्किल घड़ी में परिवार का इतना साथ दिया। उनकी पत्नी और बेटा भी प्रेरणा के बहुत अहसानमंद हुए और प्रेरणा का आभार प्रकट किया।
शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’

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