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ग्रामीण सामाजिक परिवेश — अलका गर्ग,गुरुग्राम

 

आज ग्रामीण सामाजिक परिवेश के सारे समीकरण बदल चुके हैं।विगत कुछ वर्षों में हरेक क्षेत्र में विद्युत गति से बदलाव देखने को मिल रहे हैं।वेश-भूषा,खान-पान,
रहन-सहन शिक्षा प्रणाली,कार्य प्रणाली,त्यौहार पर्व…हरेक क्षेत्र में विकास के साथ साथ बदलाव भी बहुत हुआ है।
रमा गाँव के खाते पीते किसान परिवार की लड़की थी।गाँव के स्कूल से बरहवीं पास करने के बाद उसने प्राइवेट कोर्स द्वारा स्नातक और शिक्षक पद के लिए ज़रूरी प्रतियोगी परीक्षायें भी पास कर लीं थीं और वहीं अपने स्कूल में ही शिक्षिका के पद पर आसीन हो गई थी।पढ़ाई और विभिन्न गतिविधियों में अव्वल होने के कारण उसके रहन सहन,बात चीत और व्यवहार के तरीक़े में वहाँ के लोगों की अपेक्षा काफ़ी बदलाव आ गया था।बहुत शालीन और सुघड़ थी वह।उसकी यह शालीनता गाँव के लोगों को उसका घमंड और नख़रा लगती थी जबकि रमा ऐसी लड़की नहीं थी।उसका स्कूल में अन्य पुरुष शिक्षकों के साथ नौकरी करना,हँसना बोलना भी ग्रामीण सामाजिक परिवेश में उचित नहीं समझा जाता था परन्तु उसकी उच्च शिक्षा और अव्वल परिणाम के कारण सभी चुप थे।
रमा का लड़के की तरह पोशाक
पहनना,स्कूटर चलाना,बाज़ार,बैंक,
स्कूल,खेतों का काम सम्हालना अभी भी ग्रामीण समाज को स्वीकार नहीं था।जबकि मोटरसाइकिल,मोबाईल और नये फ़ैशन के कपड़े,चश्मा गाँव के लड़के लड़कियाँ धड़ल्ले से इस्तेमाल करते थे।परंतु वह बिना किसी की परवाह किए सब कुछ अपना कर्तव्य समझ कर करती रही।
वह खेत के काम,बीज,फसल,
ट्रेक्टर चलाना गाय की देखभाल, चारा सभी कामों में अपने पिता और भाई की मदद करती और घर के कार्य और रसोई में माँ की मदद करती थी।
सामाजिक ग्रामीण परिवेश में पलने,
रहने वाले लोग मानसिक रूप से कितने भी विकसित हो गये हों परंतु अभी भी एक स्त्री को मर्द के समान कार्य,व्यवहार करते हुए,पहनावा और बराबरी करते हुए देखने के आदी नहीं होने के कारण मन से स्वीकार नहीं करते।उन्हें यह व्यवहार उदंडता पूर्ण लगता है ।रमा ने अपने सौम्य व्यवहार और उदाहरण से सामाजिक सोच को बदलने पर मजबूर कर दिया।शहर के एक अमीर परिवार में उसका विवाह हुआ तो अपनी कर्मठता और होशियारी के कारण उसने बहुत जल्दी ही शहरी माहौल भी अपना लिया।और ग्रामीण परिवेश से आई लड़की शहरी परिवेश में कैसे निर्वाह करेगी …यह सोच भी बदल दी।

अलका गर्ग,गुरुग्राम

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