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कहानी: स्वप्न बना विवाद– महेश तंवर सोहन पुरा

 

अरावली की तलहटी में एक छोटा सा गांव था, भोंदू का वास। जहां के लोग खेती-बाड़ी व पशुपालन कर अपना जीवन निर्वाह किया करते थे। शाम होते ही बुजुर्ग लोग हुक्का पीने के लिए बाहर चौक में बैठ जाया करते थे ।साथ में बच्चे भी किस्सा- कहानी सुनने के लिए बैठ जाया करते थे। शिक्षा का स्तर बिल्कुल गोण था। अतः पढ़ने का कोई नाम ही नहीं था ।सर्दी का समय था। सभी अलाव जला रखे थे और अपने को तपाते हुए बातचीत कर रहे थे। उनमें से एक का नाम बोदूराम था। उसने कहा कि आज सभी रात को आया सपना बताना होगा । सभी ने हां भरी। उनमें से एक का नाम चौथमल था। चौथमल ने कहा कि यार बोदू पहले तू सुना। बोदू ने कहा, ठीक है। पहले मैं सुनाता हूं।
सुनो, मैं एक मकान की नींव खोद रहा था। खोदते हुए माया से भरा एक घड़ा मिला। जिसे लेकर सुनार की दुकान पर ले गया और कहा कि इसके बदले मुझे कुछ नगद रुपए दे दो। सुनार खुश होता हुआ उसे नगद रुपए दे दिए। जिसे लेकर मैं एक गाड़ी खरीदी और सभी को बैठाकर वृंदावन घूमने चला गया। लेकिन जगह नहीं होने की वजह से चौथमल को नहीं बैठा सका । चौथमल अकेला घर पर ही रहा। आंख खुली तो कुछ नहीं था। अब तू बता चौथमल तेरे को कैसा सपना आया।
चौथमल कहने लगा कि मैं एक बहुत बड़ी हवेली बनाया। उसमें पांच कमरे थे। चार कमरे तो मैंने रखा और एक कमरा तुझे दे दिया। बोदूराम ने कहा, यार मुझे एक कमरा ही क्यों दिया? मैं भी तो तेरा भाई हूं। चौथमल ने कहा कि भाई पैसे मैंने लगाया है इसलिए चार कमरे तो मेरे ही हैं। तूने भी तो मुझे गाड़ी में नहीं बैठाया। ऐसे करते-करते आपस में झगड़ा बढ़ गया और दोनों लहू-लुहान हो गए। दोनों पुलिस में गए। दोनों ने अपनी-अपने दलील सुनाई। थानेदार ने हंसते हुए दोनों को डंडे मार कर भगा दिया। इस प्रकार स्वप्न ही विवाद का कारण बन गया।

महेश तंवर सोहन पुरा
नीमकाथाना (राजस्थान)

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