साहित्यकारों की प्रतिभा को मिल रहा सम्मान, मां सरस्वती शिक्षा फाउंडेशन की अनूठी पहल
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित मां सरस्वती शिक्षा फाउंडेशन पिछले एक वर्ष से देशभर के साहित्यकारों को प्रतिदिन निःशुल्क प्रमाण पत्र प्रदान कर साहित्य सेवा का अनूठा कार्य कर रहा है। फाउंडेशन की अध्यक्ष एडवोकेट शिवानी जैन ने बताया कि संस्था की निःशुल्क योजना के माध्यम से प्राचीन भारतीय विचारधारा “वसुधैव कुटुम्बकम्” को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
फाउंडेशन के सचिव डॉ. एच.सी. विपिन कुमार जैन ने जानकारी दी कि संस्था द्वारा संपूर्ण भारत के साहित्यकारों की प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से प्रतिदिन निःशुल्क साहित्यिक स्पर्धा आयोजित की जाती है, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं। साथ ही साहित्यकारों की मौलिक रचनाओं को पुस्तक के रूप में भी निःशुल्क संपादित किया जाता है, जिससे हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा मिल रही है।
इस साहित्यिक अभियान से जुड़े प्रमुख साहित्यकारों में एस. अनंत कृष्णन, रश्मि सिंह, भगवती शिव प्रसाद भिवानी, प्रेमलाल किशन, सुमन महेश्वरी जाजू, डॉ. सुमन मल्होत्रा, डॉ. बी.एल. सैनी, डॉ. अंजू लता जैन, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. रामबली मिश्र, डॉ. नितिन तिवारी, डॉ. अखिलेश कुमार, वीरेंद्र जैन माहिर, श्रीमती मालती जैन, डॉ. रूपाली गर्ग, शेख नसरीन, डॉ. संजीदा खानम शाहीन, डी. शाहिना, डॉ. रानी सक्सेना, अशोक ठाकुर, डॉ. रश्मि मल्होत्रा, डॉ. शिखा, डॉ. कंचन जैन, नीतू अंबर, डॉ. पूर्णिमा संघी, इंदरजोत कौर, डॉ. नवदीप गंडोत्रा, रमाकांत शर्मा, डॉ. जगदीश नारायण गुप्ता, सुमन गुप्ता, पंकज, सुनील कुमार खुराना, वीणा शुक्ला अवस्थी, आरती दुबे, कृष्ण कुमार गुप्ता, कवि कृष्ण वियोगी, डॉ. मोहन तिवारी और आशीष सहित अनेक साहित्यकार सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
संस्था के संरक्षक संजय पांडे समय-समय पर साहित्यकारों का उत्साहवर्धन करते रहते हैं, जिससे रचनाकारों का मनोबल बढ़ता है और हिंदी भाषा के प्रति उनका समर्पण और सुदृढ़ होता है। फाउंडेशन का उद्देश्य हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक रचनाकारों को प्रोत्साहित करना है




