Uncategorized

नौकरी, पद, रुतबे सब जीरो – अनिल लढ्ढा अध्यक्ष सम्पर्क संस्थान व वरिष्ठ पत्रकार

 

एक रिटायर्ड पुलिस कमिश्नर ने अपने सरकारी बंगले से निकलकर कॉलोनी में स्थित अपने निजी घर में आकर रहना शुरू किया। उन्हें अपने पद और प्रतिष्ठा पर बहुत गर्व था।

हर शाम जब वे कॉलोनी के पार्क में टहलने जाते, तो किसी से बात नहीं करते। किसी को देखना तक उन्हें ज़रूरी नहीं लगता था। उन्हें लगता था कि ये लोग उनके स्तर के नहीं हैं।

एक दिन जब वह पार्क की एक बेंच पर बैठे थे, तभी एक बुजुर्ग आकर उनके पास बैठ गया और बातचीत शुरू की।
कमिश्नर साहब ने उसकी बातें अनसुनी कर दीं और खुद की नौकरी, पद, रुतबे की ही बातें करते रहे। बोले – “मैं यहाँ इसलिए रहता हूँ क्योंकि यह मेरा अपना घर है।”

ऐसे कई दिन बीते… वो बुजुर्ग चुपचाप सुनता रहा।

फिर एक दिन, बुजुर्ग ने कहा –
“देखिए कमिश्नर साहब, बल्ब जब तक जलता है तब तक उसकी कीमत होती है। बुझने के बाद वो किसी भी वॉट का हो – 10, 20, 100 – सब बराबर हो जाते हैं।
मैं पिछले 5 साल से इस कॉलोनी में हूँ, लेकिन मैंने आज तक किसी को नहीं बताया कि मैं दो बार सांसद रह चुका हूँ।”

कमिश्नर साहब का चेहरा बदल गया।

बुजुर्ग ने आगे कहा –
“आपके दाएँ कोने में जो वर्मा जी बैठे हैं, वे रेलवे में जनरल मैनेजर थे। सामने हँसते हुए बात कर रहे राव साहब सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। वहाँ सफेद कपड़ों में जो शिवा हैं, वे इसरो के चेयरमैन रह चुके हैं – लेकिन किसी ने कभी यह नहीं बताया।”

“सभी बुझ चुके बल्ब हैं हम… और सभी एक जैसे हैं। चाहे वो ज़ीरो वॉट हो या डेकोरेटिव LED – बुझने के बाद सबका मूल्य एक समान हो जाता है।”

“पुलिस कमिश्नर हो या पुलिस कांस्टेबल – रिटायरमेंट के बाद एक ही श्रेणी में आ जाते हैं।”

“उगता सूरज और डूबता सूरज – दोनों सुंदर होते हैं, पर लोग सिर्फ उगते सूरज को ही प्रणाम करते हैं। ये सत्य हमें स्वीकार करना चाहिए।”

“हमें समझना होगा कि पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं हैं। अगर हम इन्हें ही अपनी पहचान मानते हैं, तो भूल जाते हैं कि एक दिन ये सब छूट जाएगा।”

“शतरंज की बिसात पर राजा, वज़ीर, प्यादा – सबका महत्व तभी तक है जब तक खेल जारी है। खेल खत्म होते ही सब एक ही डिब्बे में बंद कर दिए जाते हैं।”

जीवन में चाहे कितने भी मेडल और सर्टिफिकेट मिलें… अंत में हर किसी को जो प्रमाणपत्र मिलता है, वो एक ही होता है – ‘मृत्यु प्रमाणपत्र’..!!
अनिल लढ्ढा अध्यक्ष सम्पर्क संस्थान व वरिष्ठ पत्रकार ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!