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संक्षिप्त लेख : तुलना ना करें — श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

 

कभी भी दूसरों से तुलना करके आप अपनी कीमत कम मत किया कीजिए आप अनमोल है हमेशा याद रखिये।किसी के चेहरे की हंसी बनकर देखिए खुशी का तो पता नही लेकिन सुकून बहुत मिलेगा।सही प्रशंसा व्यक्ति का हौसला बढ़ाती है अधिक प्रशंसा व्यक्ति को लापरवाह बनाती है।दुनियां में ऐसी दो जगह हैं जो बहुत खुश किस्मत को ही मिलती हैं साहब किसी के दिल में जगह और किसी की दुआओं में आपका नाम अगर खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जबाब मिल जायेंगे। यदि दूसरों से बहस करोगे तो नये सवाल खड़े हो जायेंगे।दुनिया आपका हक या मौका छीन सकती है लेकिन आप की काबिलियत कोई नहीं छीन सकता।जिस दिन तुम्हे अपना मूल्य पता लग गया उस दिन से तुम्हे तुम्हारी प्रशंसा या निंदा से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर ज़िदगी में सुकून चाहते तो फोकस अपने काम पर करो लोगो की बातों पर नही खामोशी में बड़ी राहत है लफ़्ज़ों का सफर इंसान को थका देता है।लोगों की निंदा से परेशान होकर अपना रास्ता ना बदलना क्यूंकि सफलता शर्म से नहीं साहस से मिलती हैं।जीवन यदि सुखमय और आनंदमय गुजारना है तो दो बातें सीख लेनी चाहिए एक तो नजरदांज करना, दूसरा माफ़ करना।जिंदगी के रंगमंच पर ऐसा किरदार निभाओ ताकि परदा गिरने के बाद भी लोग तालियां बजाए। एक सच्चा अच्छा और समझदार इंसान वो होता है जो किसी को कुछ अच्छा करता हुआ और बढ़ता हुआ देखकर जलता नहीं है,ईर्ष्या नहीं करता है सीखता है उससे और खुश होता है।उम्मीद के साथ हम मिलते है पतझड नजर नही आते है होती है अपेक्षा मुहब्बत में बहारो फुल बरसाते है पहली पहली होती है मुलाकात रंगीन नजारा देखने मिलते है जिंदगी खुबसूरत लगती है जब तक उम्मीद के साथ जीते है।लकीरें मामूली नहीं होती माथे पर आए तो चिंता हथेली पर आए तो तकदीर जमीन पर खींची तो बंटवारा और रिश्ते में आए तो दरार कर देती है। एक खूबसूरत परिवार को बनाने के लिए हमें एक दूसरे की कुछ गलतियों को भूल जाना चाहिए कुछ को नजरअंदाज कर माफ़ कर देना चाहिए सबकी अपनी आदतें हैं सबका अपना व्यक्तित्व जैसे इंद्रधनुष के सभी रंग अलग हैं सभी की खूबियां अलग हैं परन्तु सुन्दर सा इंद्रधनुष बनाने के लिए एक दूसरे में मिल जाते हैं।हमारा जीवन‌ एक किताब की तरह है किसी पन्ने पर गम लिखा है,किसी पन्ने पर खुशी लिखी है,किसी पन्ने पर उत्साह है, लेकिन अगर हम पन्ने ही नहीं पलटेंगे तो कभी जान ही नहीं पाएंगे कि अगले पन्ने पर क्या लिखा है?

“कर दूसरे का भला तो ख़ुद रब तुझ पर महरबां होगा,
किसी का भला करके देख जमाना तेरा कदर दान होगा।”

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर- गुजरात)

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