ब्राह्मण समाज पर बयानबाज़ी लोकतंत्र के लिए घातक : विश्व सनातन संघ ब्राह्मणों पर बयानबाज़ी, राजनीति का गिरता स्तर

आज के राजनीतिक माहौल में एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से उभर रही है कुछ नेता अपने भाषणों और बयानों में बार-बार ब्राह्मण समाज को निशाना बना रहे हैं। यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि राजनीति का स्तर किस दिशा में जा रहा है। जिन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए जैसे शिक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई और सामाजिक समरसता उनसे ध्यान भटकाकर समाज को वर्गों में बाँटने का प्रयास किया जा रहा है। ब्राह्मण समाज कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता की वह बौद्धिक धारा है जिसने ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और नैतिक मूल्यों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत से लेकर आधुनिक भारत के संविधान तक हर युग में इस समाज की भूमिका विचार और विवेक के रूप में रही है। विश्व सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान शर्मा, राष्ट्रीय संरक्षक विष्णु दास नागा, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. राकेश वशिष्ठ एवं राष्ट्रीय सलाहकार जे. पी. शर्मा ने संयुक्त बयान में कहा कि किसी भी समाज को राजनीतिक लाभ के लिए अपमानित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। ब्राह्मण समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को जोड़ने का कार्य किया है, न कि विभाजन का। उन्होंने कहा कि जब राजनीति में तर्क समाप्त हो जाते हैं, तब इस प्रकार की बयानबाज़ी शुरू होती है। किसी भी वर्ग को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना न तो संवैधानिक है और न ही सामाजिक दृष्टि से स्वीकार्य। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान और अधिकार देता है। संघ के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज न तो टकराव चाहता है और न ही किसी प्रकार का विशेषाधिकार, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता भी नहीं करेगा। यदि इस तरह की भाषा पर रोक नहीं लगी, तो समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपना विरोध दर्ज कराएगा। नेताओं को चाहिए कि वे समाज को बाँटने के बजाय जोड़ने की राजनीति करें, क्योंकि राष्ट्र निर्माण संवाद और समरसता से होता है, आरोप-प्रत्यारोप से नहीं। सरकारों को स्वामी प्रसाद मौर्या जैसे लोगों के खिलाफ समय रहते कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए




