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मैं उस पीढ़ी की बेटी हूं! — डॉ- डिम्पल सैनी

जहां बिन कहे सब सीख जाती बेटियां, घर को स्वर्ग बनाती बेटियां।
मैं उस पीढ़ी से ताल्लुक रखती हूँ जहाँ बेटियों को हाथ पकड़कर घर के काम ‘सिखाए’ नहीं जाते थे, हम अपनी आँखों से देखकर सब ‘सीख’ जाते थे। हमारा घर ईंटों का पक्का तो था, पर उसका आँगन और फर्श मिट्टी का था। जब मेरी माँ थककर सो जातीं, तो मैं चुपचाप गोबर और पीली मिट्टी का घोल तैयार करती और पूरे आँगन को इतनी खूबसूरती से लीप देती कि वह मखमल की तरह चमकने लगता। भाइयों के कपड़े धोना, उन्हें प्रेस करना और घर को सजाना—यह सब मैंने किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपनी माँ को खुशी देने के लिए किया। साथ पढना भी होता था स्वयं के लिए। क्योंकि कोई नहीं कहता था कि पढो़।
मेरी शादी मात्र 19 साल की उम्र में हो गई। मैं एक बड़े संयुक्त परिवार की बहू बनकर ससुराल आई। लोग सोचते थे कि इतनी कम उम्र की पढीलिखी लड़की इतना बड़ा परिवार कैसे संभालेगी, लेकिन सच तो यह है कि मुझे ससुराल में किसी ने कुछ नहीं सिखाया और ना ही मुझे किसी से कुछ पूछने की ज़रूरत पड़ी।
आज की पीढ़ी को मेरा यही संदेश है: पढ़ना-लिखना बहुत ज़रूरी है, पर उसके साथ-साथ घर के कामों में निपुण होना भी आवश्यक है। घर का काम हमें छोटा नहीं बनाता, बल्कि एक कुशल बेटी ही घर को असल में ‘स्वर्ग’ बनाती है।

“घर को स्वर्ग बनाती बेटियाँ”
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सिखाया नहीं किसी ने मुझको,
माँ को देख-देख सब सीखा है
पढ़ाई के साथ घर के कामों में
मैंने जीवन का सच देखा है।

उन्नीस साल की नन्ही उम्र में
संयुक्त परिवार को संभाला था,
मायके की उस मूक शिक्षा ने ही
ससुराल में मुझको ढाला था।

मिट्टी का वो कच्चा आँगन
मैंने अपने हाथों से सँवारा
बिन कहे माँ के हर बोझ को
मैंने हँसकर ही उतारा।

आज की पीढ़ी से बस इतना कहना
घर का काम भी एक कला है
इसी से घर स्वर्ग बनता है
इसी में सबका भला है।

“पढ़ाई के साथ-साथ संस्कारों की डिग्री भी ज़रूरी है। मेरी ज़िंदगी का यह अनुभव शायद आज की पीढ़ी के काम आ सके।

“क्या आपको भी लगता है कि केवल किताबों की पढ़ाई ही काफी नहीं है, बल्कि घर को सँवारने का हुनर भी हर बेटी के पास होना चाहिए?”

“क्या आपके घर में भी कोई ऐसा है जिसने बिना सिखाए, सिर्फ अपनों के प्रति प्यार की वजह से घर की ज़िम्मेदारियाँ संभाल लीं? अपनी कहानी कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

“मिट्टी के आँगन की वह सौंधी खुशबू किसे-किसे याद है? अपनी यादें हमारे साथ साझा करें।”
डॉ- डिम्पल सैनी

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