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वेलेंटाइन डे — बंदना मिश्रा

ले कलम वेलेंटाइन डे पर मै भी कुछ लिखने बैठ गई।
क्या लिखूं सोचते सोचते चौदह तारीख पर मै अटक गई।
कलम ठहर गई नहीं लिख पाई कुछ भी वेलेंटाइन डे पर।
चौदह तारीख आज के ही दिन पुलवामा अटैक बिजली सी कौंध गई।
भारत मां की रक्षा की खातिर जिसने अपना सुहाग गवा दिया।
उन मां, बहन और बेटियों का चेहरा नजरों के सामने घूम गया।
छुप कर पाक ने अपने ना पाक इरादे को जो अंजाम दिया।
आँखे मेरी नम हो गई तब पुलवामा अटैक को जब याद किया।
चालीस के बदले चार हजार को मारेंगे सरकार ने हमको वचन दिया।
देर ना लगी भारत के वीर जवानों ने पाक में घुस कर तांडव मचा दिया।
पूरब ,पश्चिम, उत्तर ,दक्षिण पाकिस्तान का कोना- कोना थर्रा गया।
रूह कांप गई उनकी जब भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश
गोरखपुर।




