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कलमप्रिया साहित्यिक संगोष्ठी में साहित्य, संस्कार और सृजन का अनुपम संगम।

 

सुनिता त्रिपाठी’अजय नजर इंडिया संवाद

जयपुर। आ. प्रतिभा जी एवं वंदना जी द्वारा अपने निवास पर आयोजित इस गरिमामयी साहित्यिक संगोष्ठी का शुभारंभ अत्यंत आत्मीय वातावरण में हुआ। दोनों ही आदरणीय मेज़बानों ने सभी आगंतुकों का नमस्ते, स्नेहपूर्ण आतिथ्य, स्वादिष्ट भोजन एवं उत्कृष्ट मान-सम्मान के साथ स्वागत किया, जिससे कार्यक्रम की शुरुआत ही अपनत्व और गरिमा से भर गई।
आदरणीय शशि सक्सेना जी, जो संस्थान की संस्थापक हैं, ने भी सभी अतिथियों का विशेष रूप से फूलों द्वारा अभिनंदन किया। वहीं वंदना जी द्वारा तिलक लगाकर एवं मोतियों की माला पहनाकर अतिथियों का पारंपरिक एवं हृदयस्पर्शी स्वागत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को और भी मंगलमय बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पुनीता के द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सहज शैली में किया गया। उनकी वाणी, संयोजन और प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को एक सुंदर सूत्र में पिरोए रखा।
इस अवसर पर श्रीमती अनुराधा माथुर द्वारा प्रस्तुत माँ वंदना एवं अन्य भावपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी रचनाओं में आज के समसामयिक विषयों, राजस्थानी संस्कृति की झलक तथा सभी रसों का अद्भुत समावेश देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख साहित्य साधकों में
आ. शशि सक्सेना जी, आ. सुषमा शर्मा ,आ. रेशमा खान,सरोज पालीवाल कमलेश चौधरी, कमलेश शर्मा, उषा शर्मा ‘दीपशिखा’, अनिता सिंह, पवनेश्वरी वर्मा, आशा अरोड़ा, हिमाद्री ‘समर्थ’, शशि तनेजा, आशा प्रणामी, डॉ. नेहा पारीक, सुमन पहाड़िया, सुनिता त्रिपाठी ‘अजय’, मीनू अग्निहोत्री, मंजु कपूर, श्रीमती अनुराधा माथुर, डॉ. पूनम केसवानी, डॉ. स्नेह लता सहाय,आ. शारदा जेटली जी, डॉ. पुनीता कुमारी, एवं अंजना चड्ढा सहित अनेक साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सभी रचनाकारों ने अपने काव्य पाठ के माध्यम से समाज, संस्कृति, नारी शक्ति एवं मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया। पूरे आयोजन में तालियों की गूंज, सराहना और उत्साह का वातावरण बना रहां।
सुनिता त्रिपाठी’अजय जयपुर राजस्थान

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