नारी तू कभी ना हारी — हसमुख बी. पटेल, ‘हर्ष’-’परख’ नारदीपुर-अहमदाबाद

मानव सभ्यता के इतिहास में यदि किसी शक्ति ने निरंतर संघर्ष करते हुए भी अपने अस्तित्व, संवेदना और सामर्थ्य को जीवित रखा है, तो वह है नारी। नारी केवल सृजन की जननी ही नहीं, बल्कि साहस, त्याग, धैर्य और संघर्ष की अद्भुत प्रतिमा है। समय-समय पर समाज ने उसके मार्ग में अनेक बाधाएँ खड़ी कीं, फिर भी नारी ने हर चुनौती का सामना करते हुए यह सिद्ध किया कि “नारी तू कभी ना हारी।”
हर वर्ष ८ मार्च को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ( International Women’s Day ) मनाया जाता है। यह दिन केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन संघर्षों और उपलब्धियों का सम्मान करने का दिन है, जिनके माध्यम से महिलाओं ने समाज, विज्ञान, राजनीति, साहित्य और मानवता के हर क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
भारत के इतिहास में नारी के साहस का एक अद्भुत उदाहरण हैं रानी लक्ष्मीबाई।जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों ने झांसी पर अधिकार करने का प्रयास किया, तब रानी लक्ष्मीबाई ने वीरता के साथ युद्ध किया। एक हाथ में तलवार और पीठ पर अपने पुत्र को बाँधकर युद्धभूमि में उतरने वाली यह वीरांगना आज भी नारी शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी नारी पराजित नहीं होती। इनके साथ साथ भारतीय इतिहास ऐसी गौरवान्वित नारीशक्ति के कार्यो से लिखा हुआ है जिनमें से कुछ नाम तो लेने ही चाहिए।
* रानी पद्मिनी ( पद्मावती ): राजपूताना रानी पद्मिनी, जिन्होंने अपनी सौंदर्य और साहस की कहानी से अपनी पहचान बनाई।
* माता जीजाबाई: छत्रपति शिवाजी की माता, साहसी नेतृत्व की प्रतीक।
* अहिल्याबाई होल्कर: मराठा साम्राज्य की शासक, जो न्यायप्रियता और शासन के लिए प्रसिद्ध थीं।
* मैडम भीकाजी कामा: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विदेशों में भारतीय ध्वज फहराने वाली क्रांतिकारी।
* सरला ठकराल: भारत की पहली महिला पायलट (1936)।
* इंदिरा गांधी ( आयरन लेडी ): भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री, जो अपनी कूटनीतिक और दृढ़ क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
* सरोजिनी नायडू ( भारत कोकिला ): स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता और भारत की पहली महिला राज्यपाल।
* बचेंद्री पाल: माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला।
* सावित्रीबाई फुले : भारत की पहली महिला शिक्षिका, जिन्होंने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए संघर्ष किया। )
* किरण बेदी: भारत की पहली महिला IPS अधिकारी।
* पी.वी. सिंधु: ओलंपिक में पदक जीतने वाली प्रमुख बैडमिंटन खिलाड़ी।
आधुनिक भारत में भी अनेक महिलाएँ प्रेरणा का स्रोत बनी हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में कल्पना चावला का नाम अत्यंत सम्मान से लिया जाता है। हरियाणा के छोटे से शहर करनाल से निकलकर उन्होंने अंतरिक्ष तक का सफर तय किया। उनकी उपलब्धि ने लाखों बेटियों को यह विश्वास दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। खेल के क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। भारत की प्रसिद्ध मुक्केबाज़ मेरी कोम इसका सशक्त उदाहरण हैं। अत्यंत साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय के बल पर विश्व चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी ही कठिन क्यों न हों, यदि मन में विश्वास हो तो सफलता अवश्य मिलती है।
यदि हम अपने आसपास देखें तो पाएँगे कि नारी केवल बड़े मंचों पर ही नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में भी निरंतर संघर्ष करती है। एक माँ अपने परिवार के लिए त्याग करती है, एक शिक्षिका बच्चों के भविष्य को आकार देती है, एक चिकित्सक जीवन बचाती है, और एक किसान महिला खेतों में परिश्रम करके समाज का पेट भरती है। यह सभी रूप नारी की अटूट शक्ति को दर्शाते हैं। आज का युग परिवर्तन का युग है। शिक्षा, जागरूकता और समान अवसरों के माध्यम से महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। फिर भी समाज का कर्तव्य है कि वह नारी को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार प्रदान करे, ताकि वह अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सके।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नारी केवल सम्मान की पात्र ही नहीं, बल्कि समाज की प्रगति की आधारशिला भी है। जब नारी सशक्त होती है, तब परिवार सशक्त होता है, समाज सशक्त होता है और राष्ट्र भी सशक्त बनता है। अतः यह कहना बिल्कुल सत्य है कि इतिहास, वर्तमान और भविष्य – तीनों ही यह गवाही देते हैं कि “नारी तू कभी ना हारी।” नारी हर परिस्थिति में संघर्ष करती है, आगे बढ़ती है और अंततः अपनी विजय की कहानी स्वयं लिखती है।
हसमुख बी. पटेल, ‘हर्ष’-’परख’
नारदीपुर-अहमदाबाद




