आज की हकीकत – –एकजुटता की कमी से कमजोर पड़ता चौथा स्तंभ – वरिष्ट पत्रकार व संपादक पुष्पा भाटी की कलम से
आज की हकीकत यही है कि पत्रकारिता अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रही है। खबरों की तेज़ी बढ़ी है, लेकिन सच्चाई की पकड़ कमजोर होती जा रही है। ऐसे समय में पत्रकारों की एकजुटता ही वह ताकत है जो चौथे स्तंभ को मजबूती दे सकती है—लेकिन दुर्भाग्य से यही सबसे बड़ी कमी बनती जा रही है।
जिले में कई संगठन और यूनियन हैं, हर किसी के पास अपना दफ्तर और बैठने की जगह है, लेकिन पत्रकार समाज आज भी बिखरा हुआ है। न कोई साझा मीडिया हाउस, न लाइब्रेरी, न कोई स्थायी मंच—यह स्थिति केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि आपसी एकजुटता के अभाव का परिणाम है।
आज पत्रकार अपने-अपने स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सामूहिक शक्ति का अभाव उन्हें कमजोर बना रहा है। जब तक पत्रकार एक मंच पर नहीं आएंगे, तब तक न तो उनके अधिकार मजबूत होंगे और न ही समाज में उनकी आवाज़ उतनी प्रभावी रह पाएगी।
संदेश
“अगर चौथे स्तंभ को मजबूत रखना है, तो पत्रकारों को एकजुट होना ही होगा।”



