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डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ ने बनाया चौथा वर्ल्ड रिकॉर्ड-अन्तराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया गौरव

 

बैतूल, मध्यप्रदेश-बैतूल के वरिष्ठ साहित्यकार स्व. ठा. नरेन्द्र सिंह पुण्डीर की प्रतिभाशाली साहित्यकार सुपुत्री डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ ने एक बार फिर से अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करते हुए जिले का नाम रोशन किया है। उन्हें यू. एन. बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान *दुर्गायन* विषय पर आयोजित विश्व के सबसे लंबे ऑनलाइन काव्य आयोजन में उनकी सक्रिय एवं प्रतिभाशाली भागीदारी के लिए प्रदान किया गया। यह आयोजन 21-22 मार्च 2026 को सम्पन्न हुआ, जिसमें 250 से अधिक कवियों ने विश्व भर से भाग लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन साहित्यिक संस्था साहित्योदय द्वारा किया गया, जिसके संस्थापक पंकज प्रियम है। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और साहित्य को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।

प्रमाण पत्र में डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के उत्कृष्ट प्रदर्शन, समर्पण, दृढ़ता और साहित्य के प्रति जुनून की सराहना करते हुये उन्हें इस वैश्विक उपलब्धि को विश्व स्तरीय साहित्यिक योगदान माना गया है।
इसके पूर्व डॉ. अनुमेहा को चन्द्रयान-3, जो कि इसरो वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर आधारित था, में सबसे अधिक कविताओं के संकलन के रूप में दर्ज किया गया, के लिए इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सहभागिता के लिये प्रमाण पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया।
तीसरा विश्व रिकॉर्ड डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ के काव्य संग्रह *उच्छ्वास की सांस* को आई एस ओ द्वारा पेंटागन वर्ल्ड रिकॉर्ड दिया गया, जो उनके लिए गौरव की बात है।
उनका चौथा वर्ल्ड रिकॉर्ड ‘वन्दे मातरम’ भारतीय हरित धरोहर (शस्य श्यामल मातरम) जिसमें 101 कविताओं शामिल है, जिसे इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सहभागिता करने पर प्रशस्ति पत्र के साथ मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया है।
डॉ. अनुमेहा वर्तमान में बैतूल जिले के एन आर आई कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य है, वे शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं और अपने कुशल नेतृत्व से छात्राओं को नई दिशा प्रदान कर रहीं हैं। वहीं साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनाएँ समाज की सम्वेदनाओं, संस्कारों और मानवीय मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहीं हैं।उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरष्ट्रीय सम्मनों से अनेकों बार सम्मानित किया जा चुका है। उनकी उपलब्धियां ये दर्शाती है कि निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं हैं।

उनकी अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं एवं पांच पुस्तकें प्रकाशनार्थ है। उनके 100 से अधिक आलेख एवं 475 से अधिक साझा संकलनों में सहभागिताओं के द्वारा रचनायें प्रकाशित हो चुकी है। साथ ही उनके आलेख एवं कविताएं राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं एवं मैगजीन में लगातार प्रकाशित होते रहते है।
वे युवाओं के लिए प्रेरणा का कार्य कर रहीं हैं।

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