जरूरतमंदों के लिए कुछ करने की चाह — प्रेममणी एसलीना सिमरन

मुझे यकीन है कि हममें से बहुत यह चाहते ही होंगे की हम जरूरतमंदों के लिए कुछ कर पाए,
ताकि उनका जीवन कुछ आसान हो जाए।किंतु बहुत बार हम स्वयं से ही हार जाते,इसलिए की हम जितना कमाते है वो तो हमारे स्वयं के खर्च के लिए होता है,कई मामलों में तो हमारी आवश्यकताएं हमारी कमाई को चिढ़ाती है, जिसमे खुद का खर्चा भी उठाना भी मुश्किल होता है,
मेरे मामले में की मैं स्वयं ही हाउसवाइफ हूं,किंतु मैं भी लोगो के लिए बहुत पहले से ही बहुत कुछ करना चाहती हूं लेकिन नही कर पाती हूं।इन दिनों मैं जब सोशल मीडिया में लोगो को एक दूसरे की मदद करते देखती हूं तो,ये ईच्छा और बलवती हो जाती है।फिर भी आज मैं किसी न किसी तरह जरूर कुछ लोगो की मदद करती हूं,
#चाहे किसी का मोरल सपोर्ट करके।
या फिर लोगो के लिए प्रार्थना करके।
या फिर मेरे पास जो भोजन,कपड़े होते है वो किसी जरूरतमंद को देकर।
या फिर बहुत अन्य जरिए से जैसे भी मुझ से होता है।जब सोशल मीडिया में ऐसे मददगारो देखती हूं फिर कुछ के गलत कॉमेंट्स पढ़ती हूं कि,ये नाम कमाने के लिए किए जा रहे है,
सच कहूं तो गुस्सा तो आता ही है साथ ही दिल भी टूट जाता है।
ऐसे लोग तो सिर्फ आशीर्वाद और प्यार के हकदार होते है जो निस्वार्थ सेवा करते है और करना चाहते है।
जो लोग ऐसे लोगो पर गलत टिप्पणी करते है,वे चाहे तो ऐसा कदम स्वयं भी उठा सकते है।क्या यह सिर्फ सरकार का ही काम है???
क्या इनके प्रति हमारा भी कोई फर्ज नही है???
क्या हम खुद आरामदायक बिस्तर में सोए और फुटपाथों,झुग्गी झोपड़ियों अन्य जरूरतमंदो को मरता हुआ देखते रहे???
क्या हम खुद अच्छे अच्छे भोजन खाए दावते उड़ाए और जरूरतमंदो को अनदेखा कर दे???
क्या हम भूखे,प्यासे,निर्वस्त्र लोगो को उनके हाल में छोड़ दे? किसकी आत्मा गवाही दे सकती है जरा बताए??हां हम जो कुछ काबिल नही है लेकिन किसी न किसी तरह इनकी प्राथमिक आवश्कताओ को पूरा तो कर ही सकते है।
शायद किसी को भी इस तरह कमियों में जीवन बिताना पसंद नही होगा, हां ये उनकी मजबूरी और लाचारी जरूर हो सकती है।आइए अगली बार हम भी अपने आस पास के लोगो की किसी न किसी तरह से जरूर मदद करे
और आशीर्वाद पाए,
और उनके चेहरे की मधुर मुस्कान देख उनके ह्रदय के भाव को महसूस करे, सच में इससे बड़ा शुकून आपने कभी महसूस नहीं किया होगा, तो आइए हम भी एक कदम इस ओर बढ़ाए और अपने दिल की वर्षो की दबी चाह को पूरा करे,और आत्मसंतुष्टि पाए।
प्रेममणी एसलीना सिमरन
नागपुर महाराष्ट्र




